पाकिस्तान के दौरे पर पहुंचे UN Chief ने एक अखबार से कहा। भारतीय नागरिकता कानून को विभाजनकारी और मुस्लिमों पर खतरा बताया। इससे पहले कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता की भी पेशकश कर चुके हैं गुटेरस।
नई दिल्ली। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहली आधिकारिक भारत यात्रा से करीब एक सप्ताह पहले संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने भारत के नागरिकता संशोधन कानून को लेकर बड़ी चिंता जाहिर की है। गुटेरस ने CAA के चलते देश के मुसलमानों के प्रति होने वाली कार्रवाई की ओर ईशारा किया है।
दरअसल बुधवार को अपने पाकिस्तान के दौरे के समापन से पहले संयुक्त राष्ट्र प्रमुख गुटेरस ने पाकिस्तान के अखबार डॉन को एक इंटरव्यू दिया। इस इंटरव्यू में गुटेरस ने भारत के नागरिकता संशोधन कानून पर बयान दिया।
डॉन ने गुटेरस के हवाले से लिखा है, "भारतीय संसद द्वारा पारित विभाजनकारी नागरिकता (संशोधन) अधिनियम से बाहर किए गए 20 लाख मुसलमानों के ऊपर राष्ट्रविहीन होने का जोखिम मंडरा रहा था।"
गुटेरस ने भारत में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ते जा रहे भेदभाव पर पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि वह इससे व्यक्तिगत रूप से चिंतित हैं। डॉन ने गुटेरस के हवाले से लिखा, "संयुक्त राष्ट्र के दो उच्चायुक्तों, एमनेस्टी इंटरनेशनल व ह्युमन राइट्स वॉच जैसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया और नई दिल्ली में हाल ही में जारी की कश्मीर पर फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट्स समेत सभी रिपोर्टों ने कश्मीर में असलियत में क्या हो रहा है इसे सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और जरूरी हो जाता है कि इन रिपोर्टों को गंभीरता से लिया जाए।"
इस दौरान गुटेरस ने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए भारतीय सेना द्वारा कश्मीर में बच्चों के साथ अत्याचार, यौन दुर्व्यवहार और सात साल से कम उम्र के बच्चों के उत्पीड़न के बारे में भी बात सामने रखी।
गौरतलब है कि चार दिन की पाकिस्तान यात्रा पर पहुंचे गुटेरस ने इससे पहले जम्मू एवं कशअमीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की पेशकश की थई। हालांकि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने तभी यह स्पष्ट कर दिया था कि कश्मीर के मुद्दे पर तीसरे पक्ष द्वारा मध्यस्थता किए जाने की कोई भूमिका नहीं है।