Highlights. - कालाढूंगी-नैनीताल हाइवे पर छोटी हल्द्वानी से दो किलोमीटर आगे 90 फीट लंबा इको ब्रिज - सांप-बिच्छुओं और मॉनीटर लीजार्ड जैसे सरीसृपों के लिए ये सडक़ें काल साबित हो रही हैं - इन्हें बचाने के लिए नैनीताल जिले में रामनगर क्षेत्र के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) डॉ. चंद्रशेखर जोशी ने अनोखा प्रयोग किया है
नई दिल्ली/देहरादून।
उत्तराखंड मनोरम पर्वतीय नजारों और जंगलों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहां के गहन जंगलों में अनेक प्रजातियों के जीव जंतु निवास करते हैं। यहां पर जंगलों के बीच सडक़ों से गुजरने वाले लोग हरियाली को निहार सकते हैं। बड़े जानवरों को देखकर वाहन चालक सतर्क हो जाते हैं, लेकिन सांप-बिच्छुओं और मॉनीटर लीजार्ड जैसे सरीसृपों के लिए ये सडक़ें काल साबित हो रही हैं।
इन्हें बचाने के लिए नैनीताल जिले में रामनगर क्षेत्र के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) डॉ. चंद्रशेखर जोशी ने अनोखा प्रयोग किया है। वन विभाग ने नैनीताल जाने के मुख्य मार्ग कालाढूंगी-नैनीताल हाइवे पर छोटी हल्द्वानी से दो किलोमीटर आगे 90 फीट लंबा इको ब्रिज बनाया है। रेंगने वाले जंतु पुल के जरिए सडक़ पार कर सकते हैं।
यह है खासियत
यह इको फ्रेंडली पुल है। 10 दिन में 2 लाख रुपए की लागत से बांस, घास और रस्सी से इसे तैयार किया गया है। पुल 5 फुट चौड़ा और 40 फुट ऊंचा है। पुल करीब 3 व्यितयों का भार झेल सकता है। पुल पर कैमरे लगाए गए हैं।
इस तरह रिझाएंगे
सरीसृपों को पुल के जरिए सडक़ पार करवाना भी चुनौती है। इसके लिए वन विभाग ने अलग रास्ता निकाला है। जानवरों को जंगली रास्ते का आभास कराया जाएगा, इसलिए पुल पर बेल उगाने के साथ ही घास-पāिायां लगाई गई हैं।
दूसरी जगहों पर भी बनाएंगे ब्रिज
सरीसृपों की जिंदगी बचाने के लिए महकमे ने इको ब्रिज बनाया है। परिणाम अच्छे रहे, तो दूसरी जगहों पर भी ऐसे इको ब्रिज बनाए जाएंगे। -डॉ. चंद्रशेखर जोशी, डीएफओ