
नई दिल्ली। कोराना वायरस संक्रमण (Coronavirus) के चलते स्कूल-कॉलेज काफी समय से बंद हैं। स्कूलों (Schools) को दोबारा खोलने पर अभी तक असमंजस्य बना हुआ है। वहीं लगातार बढ़ते मामलों के चलते जुलाई में यूनिवर्सिटी (University) में होने वाले फाइनल ईयर के एग्जाम (Final Year Exam) पर भी संकट के बादल मंडराते हुए दिख रहे हैं। इसी सिलसिले में मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' (Ramesh Pokhriyal Nishank) ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को पहले से जारी दिशा-निर्देशों का पुनरीक्षण करने को कहा है। इसके तहत अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को अभी रद्द किया जा सकता है।
मंत्रालय के संशोधित दिशा-निर्देशों के तहत छात्रों और शिक्षकों का स्वास्थ्य और सुरक्षा पहली प्राथमिकता होगी। इसलिए कई विशेषज्ञों का मानना है कि संशोधित शैक्षणिक कलेंडर में अधिकतर विश्वविद्यालयों की जुलाई में होने वाली परीक्षाओं को रद्द किया जाए। साथ ही हर स्टूडेंट को उसकी पिछले परफॉर्मेंस के हिसाब से नंबर देकर आगे बढ़ाया जाए। जो विद्यार्थी अंकों से संतुष्ट नहीं होंगे उन्हें इसमें सुधार के लिए बाद में परीक्षा देने का मौका दिया जाएगा।
मालूम हो कि यूजीसी ने लॉकडाउन (Lockdown) के कारण शैक्षणिक नुकसान को टालने और छात्रों के भविष्य के लिए उचित उपायों पर विचार-विमर्श करने के लिए दो समितियां गठित की थीं। जिसमें एक समिति हरियाणा विश्वविद्यालय के कुलपति कुहाड़ की अध्यक्षता में गठित की गई थी। जबकि दूसरी समिति इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) (IGNOU) के कुलपति नागेश्वर राव की अगुवाई में बनाई थी। समितियों की सिफारिश पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 29 अप्रैल को दिशा-निर्देश घोषित किए थे। जिसके तहत जुलाई में अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को कराने का निर्णय लिया गया था। मगर अब इसमें संशोधन किया गया है। मौजूदा हालात के आधार पर चीजों को फाइनल किया जाएगा।
बताया जाता है कि कॉलेजों में शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र (New Session) को भी अभी के लिए टाला जा सकता है। पिछले दिशा-निर्देशों के अनुसार कॉलेजों में पहले से भर्ती छात्रों के लिए अगस्त में और नए विद्यार्थियों के लिए सितंबर से एडमिशन की प्रक्रिया शुरू होनी थी। मगर अब नए शैक्षणिक सत्र को अक्टूबर तक टाला जा सकता है। जल्द ही इस संबंध में अंतिम दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।