
नई दिल्ली। कोरोना का प्रकोप देश में लगातार बढ़ता ही जा रहा है। इस पर काबू पाने के लिए पहले लॉकडाउन लगाया गया। इसके बावजूद कई इलाकों में हालात बेकाबू होते हुए दिखाई दिए। ऐसे में सरकार ने महाराष्ट्र, दिल्ली, यूपी और मध्य प्रदेश के कोरोना हॉटस्पॉट इलाकों को सील कर दिया है। सीलिंग की प्रक्रिया ज्यादा कठोर होती है। इसमें प्रशासन की इजाजत के बिना किसी की भी एंट्री नहीं हो सकती है। तो क्या है लॉकडाउन और सीलिंग में अंतर, आइए जानते हैं।
क्या होती है सीलिंग
सीलिंग के दौरान जिन कोरोना हॉटस्पॉट क्षेत्रों को बंद करने के लिए चुना जाता है उनमें सिर्फ पुलिस कर्मियों, स्वास्थ्य कर्मियों और सफाई कर्मियों को ही जाने की अनुमति होती है। इस दौरान मीडिया को भी इलाके में जाने नहीं दिया जाता। हालांकि अगर कोई मीडियाकर्मी उस इलाके में रहता है, तो उसको अपने दफ्तर आने-जाने की स्पेशल परमिशन दी जाती है।
ये नियम भी जरूरी
सीलिंग वाले इलाके के दो से तीन किमी के एरिया में प्रशासन के लोगों को छोड़कर सभी की एंट्री वर्जित होती है। यहां तक कि जिन इलाकों को सील किया गया है वहां रहने वाले लोग भी कहीं जा नहीं सकते हैं। उन्हें अपने घरों में ही रहना होगा। अगर कोई बीमार है तो उसे महज एंबुलेंस के जरिए ही ले जाया जा सकेगा। मरीज के परिजन उसे अपनी गाड़ी से नहीं ले जा सकते हैं।
कैसे मिलेगा जरूरी सामान
सीलिंग एरिया में किसी को भी बाहर आने-जाने की अनुमति नहीं होती है। ऐसे में फल, सब्जियां, दूध जैसे रोजमर्रा की जरूरी चीजों की सप्लाई होम डिलीवरी के जरिए की जाएगी। इसके लिए भी प्रशासनिक अधिकारी पहले लिस्ट बनाएंगे, इसके अलावा लोगों की जरूरत के हिसाब से उन्हें सामाना मुहैया कराएंगे।
सीलिंग में कठोर कार्रवाई का प्रावधान
कोरेाना हॉटस्पॉट एरिया की सीलिंग मतलब कठोर पहरा। इसलिए इन इलाकों में किसी का भी बाहर निकलना वर्जित होता है। इस दौरान अगर नियम तोड़ा जाता है तो व्यक्ति पर कठोर र्कारवाई की जा सकती है।
क्या होता है लॉकडाउन
लॉकडाउन होने पर आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर दूसरी सभी सेवा पर रोक लगा दी जाती है। लॉक डाउन का मतलब है कि अनावश्यक कार्य के लिए सड़कों पर ना निकलें। अगर लॉकडाउन की वजह से किसी तरह की परेशानी हो तो संबंधित पुलिस थाने, जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक अथवा अन्य उच्च अधिकारी को फोन करके मदद मांग सकते हैं।
पुलिस देती है चेतावनी
लॉकडाउन के दौरान अगर कोई नियम तोड़ता है और फालतू में बाहर नजर आता है तो इसमें पुलिस तुरंत कार्रवाई नहीं करती है। वो उनसे घरों में रहने की अपील करती है या चेतावनी देकर छोड़ देती है। जबकि सीलिंग में कठोर कार्रवाई होती है।