अमरीकी सरकार ने वैश्विक स्‍तर पर रूस के प्रभाव को कम करने के लिए नाटो देशों की सुरक्षा पर पहले से ज्‍यादा जोर देगा।
नई दिल्ली। सीरिया सहित कई अन्य मुद्दों पर अमरीका और रूस के बीच तनातनी जारी है। ट्रंप के शासनकाल में यह कम होने के बजाए और बढ़ता ही जा रहा है। रूस के बढ़ते खतरे को कम करने के लिए उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) सहयोगियों खासकर जर्मनी पर अमरीका ने सैन्य बजट बढ़ाने निर्णय लिया है। इसका मकसद रूस पर दबाव बढ़ाना है। ताकि रूस सीरिया व नाटो देशों में अपनी सक्रियता को कम करने के लिए मजबूर हो सके।
सूलीवान लेंगे नाटो की बैठक में हिस्सा
अमरीकी विदेश मंत्री पद के उम्मीदवार माइक्रोसॉफ्ट पोम्पियो के इस बैठक में भाग लेने के सवाल पर अमरीकी अधिकारी ने इससे संबंधित जानकारी देने से इनकार कर दिया। अमरीकी सीनेट विदेश मंत्री के लिए गुरुवार को माइक्रोसॉफ्ट पोम्पियो के नमा की पुष्टि कर सकती है। अधिकारी के मुताबिक अमरीका के कार्यवाहक विदेश मंत्री जॉन सूलीवान नाटो सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे।
नाटो देशों से अधिक योगदान की अपील
नाटो उत्तरी अटलांटिक महासागर की सीमा के 28 देशों का एक गठबंधन है। इसमें कनाडा, संयुक्त राज्य अमरीका, तुर्की और यूरोपीय संघ के अधिकांश सदस्य शामिल हैं। अमरीका नाटो के बजट के तीन-चौथाई योगदान देता है। 2016 के राष्ट्रपति अभियान के दौरान डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अन्य नाटो सदस्यों को अधिक योगदान करना चाहिए। इसके पीछे उन्होंने तर्क दिया कि यह रूस के खिलाफ आतंकवाद से मुकाबला करने के बजाय यूरोप की रक्षा पर केंद्रित है। नाटो का मिशन अपने सदस्यों की स्वतंत्रता की रक्षा करना है। आपको बता दें कि 8 जुलाई, 2016 को नाटो ने घोषणा की थी कि यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद अपने पूर्वी मोर्चे को किनारे करने के लिए हवा और समुद्री गश्त बढ़ाएगा।