चीन दक्षिण चीन सागर का एक बड़ा हिस्सा है और एक महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग माना जाता है जिसमें बड़ी मात्रा में तेल और प्राकृतिक गैस शामिल है।
नई दिल्ली। विवादित चीन सागर के ऊपर चीन की वायुसेना ने एक बार फिर से अभ्यास किया है। शुक्रवार को अमरीकी नौसेना का विध्वंसक पोत दक्षिण चीन सागर में पहुंच जाने से चीन बौखलाया हुआ है। चीन और अमरीका की इस हरकत से दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र को लेकर तनाव बढ़ सकता है। चीनी वायुसेना ने रविवार को कहा कि उसने जापान के दक्षिणी द्वीपसमूहों को पार करके दक्षिण चीन सागर और वेस्टर्न पसिफिक में अभ्यास किया। चीन ने इस तरह के अभ्यासों को युद्ध की तैयारी के लिए सर्वश्रेष्ठ बताया है। हालांकि, चीन ने यह भी साफ किया की इस सैन्य अभ्यास के पीछे उसका कोई गलत इरादा नहीं है। लेकिन दक्षिण चीन सागर और ताइवान के आस-पास उसकी गतिविधियों की धमक क्षेत्र के साथ-साथ अमरीका तक पहुंच रही है।
चीनी एयरफोर्स ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर दिए एक बयान में कहा कि Su-35 विमानों को दक्षिण चीन सागर के ऊपर उड़ाने का उद्देश्य वायु सेना की युद्धक क्षमता को बढ़ाना है। बयान में कहा गया है, 'एयर फोर्स का अभ्यास भविष्य में होने वाली जंगों का पूर्वाभ्यास है और युद्ध की तैयारी के लिए सर्वश्रेष्ठ है।'
क्यों विवादित बना है दक्षिण चीन सागर?
चीन दक्षिण चीन सागर का एक बड़ा हिस्सा है और एक महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग माना जाता है जिसमें बड़ी मात्रा में तेल और प्राकृतिक गैस शामिल है, और वे कुछ बंदरगाहों और हवा के पट्टियों के साथ रीफ्स पर कृत्रिम द्वीपों का निर्माण कर रहे हैं। दूसरी तरफ ब्रुनेई, मलेशिया, वियतनाम, फिलीपींस और ताइवान में भी समुद्र पर अपना दाव करते हैं। ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण चीन सागर के लिए कोई दावा नहीं करने वाला एक कट्टर अमरीकी सहयोगी, चीन के साथ आर्थिक संबंधों की रक्षा के लिए विवाद पर लंबे समय तक अपनी तटस्थता बनाए रखता है।
आस्ट्रेलिया दक्षिण चीन सागर पर कोई दावा नहीं कर रहा। उसने चीन के साथ आर्थिक संबंधों की सुरक्षा विवाद पर अपनी तटस्थता को लंबे समय तक बनाए रखा है। लेकिन कुछ समय से आस्ट्रेलिया और चीन के बीच संबंध बिगड़े हैं। वहीं आस्ट्रेलिया इस धारणा के साथ आसियान देशो को साथ लाने की कोशिश कर रहा है। उसकी कोशिश है कि वो जल्द से जल्द इस विवाद को सुलझाए।