दस्सू के सीईओ ने कहा कि ऐसे विवाद हमेशा दुर्भाग्यपूर्ण होते हैं
पेरिस। रफाल फाइटर जेट डील को लेकर मचे घमासान के बीच फ्रांस की विमानन कंपनी दस्सू ने सफाई दी है कि उसने अपना भारतीय ऑफसेट पार्टनर खुद चुना है। दस्सू के सीईओ ने एक मीडिया एजेंसी से बातचीत करते हुए कहा कि ऐसे विवाद हमेशा दुर्भाग्यपूर्ण होते हैं इसलिए बेहतर है कि हम शांत रहें। दस्सू और भारत के बीच सहयोग पिछले 65 वर्षों से अस्तित्व में है। भारत सरकार के मेक इन इंडिया मिशन में दस्सू को चुने जाने को भाग्यशाली बताते हुए कंपनी ने कहा कि हमें इसमें योगदान करने में गर्व का अनुभव हो रहा है।
दस्सू की सफाई
दस्सू एविएशन ने इस डील के बारे में पहली बार अपना पक्ष स्पष्ट रूप से सामने रखते हुए कहा कि उसने रफाल विमान और फाल्कन 2000 बिजनेस जेट के पुर्जों का निर्माण करने के लिए संयुक्त उद्यम दासॉल्ट रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड (डीआरएएल) की स्थापना की। कंपनी ने साफ कहा कि साझेदारी के लिए भारत के रिलायंस समूह को चुनना उसका अपना फैसला था। दस्सू ने यह भी पुष्टि की कि उसने सितंबर 2016 के फ्रांस और भारत के बीच अंतर सरकारी समझौते के तहत 36 रफाल विमान को भारत को बेच चुकी है। विमानन कंपनी ने यह भी उल्लेख किया कि भारतीय नियमों (रक्षा खरीद प्रक्रिया) के अनुपालन में दस्सू एविएशन ने खरीद मूल्य के 50 प्रतिशत मूल्य को भारत में ऑफसेट के लिए वचनबद्ध किया है। कंपनी ने साफ किया कि एविएशन ने भारत के रिलायंस ग्रुप को साझेदारी करने के लिए स्वतंत्र रूप से चुना है।
नियमों के मुताबिक हुआ रिलायंस का चयन
दस्सू ने अपने बयान में कहा कि कहा कि डीआरएएल 10 फरवरी, 2017 को बनाया गया था। फ्रांसीसी नियमों के अनुपालन में दस्सू की सेंट्रल वर्क्स काउंसिल के मुख्य संचालन अधिकारी लोइक सेगलन द्वारा 11 मई, 2017 को डीआरएएल के निर्माण के बारे में सूचित किया गया था। नागपुर में डीआरएएल संयंत्र, जिसकी आधारशिला 27 अक्टूबर 2017 को रखी गई थी, फाल्कन जेटों और रफाल विमान के कुछ हिस्सों का निर्माण करेगी। विनिर्माण प्रक्रियाओं के लिए फ्रांस में भारतीय प्रबंधकों और कुशल श्रमिकों की एक टीम को प्रशिक्षित किया गया है।
बता दें कि रफाल पर कांग्रेस आरोप लगा रही है कि राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार यूपीए सरकार द्वारा 526 करोड़ रुपये के मुकाबले 1670 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विमान खरीद रही है। इस विवाद ने हाल ही में फ्रांसीसी राष्ट्रपति ओलांद के बाद एक नया मोड़ आ गया जिसमें दावा किया था कि भारत सरकार ने खुद रिलायंस डिफेंस का नाम प्रस्तावित किया था।