अमरीकी रिपब्लिकन ( Republican ) और डेमोक्रैट्स ( Democrats ) सांसदों की अविश्वास समिति ( Antitrust Trial ) कर रही है सुनवाई। इस दौरान गूगल ( google ), फेसबुक ( Facebook ), अमेजॉन ( Amazon ) और एप्पल ( Apple ) के ऊपर लगे आरोपों पर पूछे गए सवाल। कई मौकों पर सांसदों ने सीईओ को करा दिया चुप, लगाए गए हैं गंभीर आरोप।

नई दिल्ली। दुनिया ने बुधवार रात को पहली बार वो ऐतिहासिक मौका देखा जब गूगल ( google ), फेसबुक ( Facebook ), अमेजॉन ( Amazon ) और एप्पल ( Apple ) जैसी दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनियों के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सफाई देते नजर आए। इन चारों कंपनियों के सीईओ की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये अविश्वास ( Antitrust Trial ) के मुद्दे पर अमरीकी कांग्रेस में डेमोक्रैट्स ( Democrats ) और रिपब्लिकन ( Republican ) सांसदों के सामने पेशी हुई और तमाम सांसदों ने अलग-अलग सवालों के जरिये इन्हें घेरा। 1998 में माइक्रोसॉफ्ट के बाद इसे अब तक की सबसे बड़ी सुनवाई माना जा रहा है।
अमरीकी अविश्वास उप-समिति के चेयरमैन डेविड एन सिसिलाइन की अध्यक्षता में आयोजित इस सुनवाई के दौरान गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ( sunder pichai ), फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग ( Mark Zuckerberg ), अमेजॉन के सीईओ जेफ बेजोस ( Jeff Bezos ) और एप्पल के सीईओ टिम कुक ( tim cook ) ने अपना-अपना पक्ष रखा। सुनवाई से पहले सभी सीईओ ने खड़े होकर अपना हाथ उठाकर पूरी तरह से सच कहने की शपथ ली।
इस दौरान सांसदों को अलग-अलग मुद्दों पर पांच मिनट के भीतर संबंधित सीईओ से सवाल पूछने का मौका दिया गया। कई बार सांसदों ने इन सीईओ की पुरानी ईमेल सामने लाकर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि क्या वे प्रतिद्वंदियों को खत्म करना चाहते हैं। जबकि कई बार ऐसा भी देखने को मिला कि सांसदों ने अपने सवालों से इन कंपनियों के दिग्गज अधिकारियों को चुप करा दिया या फिर धन्यवाद कहते हुए बोलने का मौका ही नहीं दिया।
इस दौरान गूगल को इसके सर्च रिजल्ट और जीमेल पर अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव ( US president Election ) को प्रभावित करने वाली नीतियों का आरोप लगाया गया। जबकि जांच के दौरान इकट्ठे किए गए सबूतों और गवाहों से बातचीत के आधार पर भी इन कंपनियों से सवाल पूछे गए।
इस माह की शुरुआत में अमरीकी अविश्वास समिति के चेयरमैन डेविड एन सिसिलाइन ने इस सुनवाई के संबंध में कहा था कि पिछले साल जून से यह उप-समिति डिजिटल प्लेटफार्मों पर बेहद कम संख्या में प्रभुत्व और मौजूदा अविश्वास कानूनों और प्रवर्तन की पर्याप्तता की जांच कर रही है।"
उन्होंने आगे बताया कि अमरीकी लोगों के जीवन में इन लोगों की केंद्रीय भूमिका को देखते हुए यह महत्वपूर्ण है कि उनके सीईओ उपलब्ध हो रहे हैं। जैसा कि हमने शुरू से ही कहा है कि इस जांच को पूरा करने के लिए उनकी गवाही आवश्यक है।
पिछले साल जून में अमरीकी संसद की न्यायपालिका समिति ने डिजिटल बाजारों में प्रतिस्पर्धा की द्विदलीय जांच की घोषणा की थी। अमरीकी सांसद इन प्रमुख अमरीकी तकनीकी खिलाड़ियों (सीईओ) की एक साल से जांच कर रहे हैं। इन अविश्वास जांचों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या ये कंपनियां प्रतिस्पर्धा-विरोधी कार्यों में संलग्न हैं और इसी के परिणामस्वरूप बहुत शक्तिशाली या बहुत बड़ी हो गई हैं।
जांच शुरू करने के समय सिसिलाइन ने कहा था, "हमारी अर्थव्यवस्था में एकाधिकार शक्ति का विकास आज हमारे सामने आने वाली सबसे अधिक आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों में से एक है। डिजिटल बाजारों में बाजार की ताकत खतरों का एक नया सेट प्रस्तुत करती है।"
इस जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि क्या ये कंपनियां डिजिटल बाजारों में एकाधिकार हासिल तो नहीं कर रही हैं। समिति यह भी आकलन करना चाहती है कि क्या अमरीका में मौजूदा अविश्वास कानून, प्रतिस्पर्धा नीतियां और मौजूदा प्रवर्तन स्तर उन मुद्दों को निपटाने करने के लिए पर्याप्त हैं, जिन्होंने हाल ही में इन सेक्टर में अपना सिर घुमा लिया है।
अविश्वास समिति यह देखने के लिए अमेजॉन से पूछताछ कर रही है कि उसने प्रतिस्पर्धी उत्पादों को विकसित करने के लिए अपने प्लेटफॉर्म पर थर्ड पार्टी सेलर्स से संवेदनशील जानकारी का उपयोग किया है या नहीं। जबकि एप्पल के मामले में की जा रही जांच का दावा है कि कंपनी ऐप स्टोर पर तीसरे पक्ष के उत्पादों पर अपने स्वयं के ऐप का अनुचित लाभ देती है। वहीं, गूगल की डिजिटल विज्ञापन उद्योग में इसके प्रभुत्व के संबंध में जांच की जा रही है; जबकि फेसबुक ने हाल ही में जिप्पी, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम जैसी प्रमुख कंपनियों के अधिग्रहण को कंपनी को संदेह के घेरे में ला दिया है।
वहीं, अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ( US President Donald Trump ) ने कहा उन्होंने बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए निष्पक्षता लाने का काम किया है और कांग्रेस अब तक इसमें विफल रही है। ट्रंप ने इस संबंध में एक ट्वीट कर लिखा, "जिस काम को कांग्रेस को वर्षों पहले कर लेना चाहिए था, अगर वो बड़ी तकनीकी कंपनियों को लेकर निष्पक्षता नहीं लाती है तो मैं इसे एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स के साथ खुद करूंगा। वाशिंगटन में वर्षों से केवल बातें हो रही हैं काम नहीं हो रहा और हमारे देश के लोग बीमार हैं और इन बातों से थक चुके हैं।"