भारतीयों को नौकरी के लिए वर्क परमिट और बिजनेस वीजा जारी करने से इनकार कर रहा मालदीव।
नई दिल्ली। मालदीव को चीन ने इतनी गहराई से जकड़ रखा है कि वह अब भारत जैसे पुराने दोस्त को भी छोड़ने को तैयार है। चीन ने उसे हर मोर्चे पर अपना गुलाम बनाने की तैयारी कर ली है।आलम यह है कि वह अब भारतीयों को नौकरी के लिए वर्क परमिट और बिजनेस वीजा जारी देने से भी इनकार करने लगा है। इस तरह की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इसकी वजह से कामगारों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ मालदीव में काम करने वाले लोग और वो लोग जो कुछ समय बिताने के लिए भारत वापस आए थे वे अब मालदीव वापस नहीं जा पा रहे हैं। इसे लेकर भारत अपनी आपत्ति भी जता चुका है।
तीन हेलीकॉप्टर वापस करने की बात कही
इससे पहले मालदीव भारत के दिए तीन हेलीकाप्टर को वापस लौटाने की बात कर चुका है। भारत ने मालदीव को तीन ध्रुव हेलीकॉप्टर दिए हैं। यह हेलीकॉप्टर वर्ष 2013 में समझौते के तहत दिए गए थे। इनमें से एक कोस्ट गार्ड तो दूसरे को भारतीय नौसेना इस्तेमाल में लाती है। भारतीय नौसेना के 28 जवानों का दल फिलहाल में मालदीव में ही है जो वापस आने के आदेश का इंतजार कर रहा है। इन जवानों का वीजा अवधि 30 जून को समाप्त होगी।
मालदीव की भूगौलिक स्थिति अहम
मालदीव की भूगौलिक स्थिति भारत के लिए काफी अहम है। यह चारों तरफ से पानी से घिरा क्षेत्र है। यहां पर भारतीय नौसेना अड्डा भी है। इस क्षेत्र से भारत हिंद महासागर में अपना प्रभुत्व कायम कर सकता है, लेकिन चीन भारत की ताकत को बढ़ने नहीं देना चाहता है। यहां से वह भारतीय नौसेना के जहाजों और पनडुब्बियों पर करीब से नजर रख सकता है। मालदीव के इस रवैये के बाद से ही भारत सरकार कूटनीतिक स्तर पर वहां लगातार संपर्क बनाए हुए है।
मालदीव में होने हैं राष्ट्रपति चुनाव
मालदीव में इसी वर्ष सितंबर में राष्ट्रपति चुनाव भी होने हैं। मौजूदा राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन जहां चीन के काफी करीब हैं वहीं पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद भारत के काफी करीब रहे हैं। ऐसे में भारत की निगाह मालदीव में चुनाव पर भी है। मौजूदा सरकार के साथ भारत के संबंधों में आई तल्खी के चलते सरकार की नजर वहां के राजनीतिक घटनाक्रम पर बनी हुई है। भारत सरकार कुछ दूसरे देशों के साथ मिलकर भी मालदीव पर कूटनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।