पेड़ की टहनियों को काटने पर ऐसा लगता है मानों जैसे किसी जानवर के अंग काट दिए हों।
नई दिल्ली। इसमें कोई शक नहीं कि पेड़-पौधों में भी जीवन है। पेड़ भी सांस लेते हैं, इनमें भी रीजेनरेशन होता है। जैसे मनुष्य और कई जानवरों में होता है में होता है। इसलिए हम मान लेते हैं, कि इनमें जीवात्मा है। लेकिन तब क्या हो जब पेड़ को काटने पर उसमें से खून निकलने लगे? जी हां! धरती पर एक ऐसे पेड़ की प्रजाति है जिसे काटने पर उसमें से खून निकलता है। दक्षिण अफ्रीका में पाए वाले ये पेड़ किआट मुकवा, मुनिंगा और ब्लडवुड ट्री के नाम से जाना जाता है।
ब्लडवुड ट्री की यही खासियत इन्हें बाकी सभी पेड़ों की प्रजातियों से अलग करती है। जब भी इसके तने या पेड़ की टहनी को काटा जाता है तो इनमें से गहरे लाल रंग के तरल पदार्थ का रिसाव होता है। इस पेड़ की टहनियों को काटने पर ऐसा लगता है मानों जैसे किसी जानवर के अंग काट दिए हों। यहां के स्थानीय लोग इसे जादुई रंग भी कहते हैं।
यहां के लोगों के लिए आस्था का प्रतीक है ये पेड़!
यहां के स्थानीय लोगों का मानना है कि इस तरल पदार्थ में रक्त से संबंधित समस्याओं का इलाज करने की जादुई क्षमता होती है। यहां के लोगों की माने तो यह अमूमन, दाद, आंखों की समस्या, मलेरिया, ब्लैकवॉटर फीवर, पेट की समस्याओं और माता के स्तन में दूध बढ़ाने में कारगर साबित होता है। जानकारी के लिए बता दें जिस तरह अन्य पेड़ों को काटने पर सफेद और पीला गोंद निकलता है, यह पदार्थ भी ठीक उसी तरह का होता है। लगभग 12 से 18 मीटर लंबाई वाले इस पेड़ पर गहरे भूरे रंग की छाल होती है। ब्लडवुड ट्री को जब भी काटा जाता है तो उसमें से या पदार्थ रिसने लगता है। ब्लडवुड ट्री की इस खासियत को देखने बड़ी संख्या में यहां टूरिस्ट पहुंचते हैं।
इन-इन चीजों में आता है काम!
पीले रंग के फूल लिए ये ब्लडवुड ट्री अपने आप में खास हैं। ब्लडवुड पेड़ से निकलने वाला गहरे लाल रंग का तरल पदार्थ पारंपरिक रूप से डाई बनाने के काम आता है। वहीं किन्हीं-किन्हीं क्षेत्रों में इस तरल पदार्थ को पशु की वसा के साथ मिलाकर चेहरे और शरीर के लिए बनने वाले कॉस्मेटिक बनाने में भी इस्तेमाल किया जाता है।