
टोरंटो. कनाडा की टोरंटो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों ने 100 से अधिक ऐसे जीन्स का पता लगाया है, जो इंसानों जैसे जीवों (प्राइमेट) में कॉमन तो हैं, लेकिन इनमें इंसान के मस्तिष्क में ही विकासवादी अंतर नजर मिला। वैज्ञानिकों के अनुसार यही हमारी संज्ञानात्मक क्षमता का स्रोत हो सकता है।
डोनेली सेंटर फॉर सेल्युलर एंड बायोमोलेक्यूलर रिसर्च के प्रोफेसर जेसी गिलिस के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने पाया कि इंसान के चार पूर्वजों चिंपैंजी, गोरिल्ला, मकाक और मार्मोसेट में इंसान का मस्तिष्क ही अलग से चीजों को व्यक्त करता है। नेचर इकोलॉजी एंड इवोल्यूशन में प्रकाशित शोध के निष्कर्षों से पता चलता है कि कम चयनात्मक दबाव या कार्य क्षमता उत्परिवर्तन (म्यूटेशन) के प्रति सहनशीलता के चलते जीन को उच्च स्तरीय संज्ञानात्मक क्षमता मिली होगी। यह अध्ययन मानव की संज्ञा कोशिका का हिस्सा हैे, जो स्वास्थ्य और रोगों को बेहतर मैप करने की पहल का हिस्सा है।
प्राइमेट के मस्तिष्क का तुलनात्मक अध्ययन
गिलिस ने बताया, यह शोध प्राइमेट्स और इंसानों के मस्तिष्क के अंतर को समझने में योगदान देता है। साथ ही इस शोध में तैयार डेटाबेस से दोनों के बीच आनुवांशिक समानताएं और अंतर को चिह्नित किया जा सकता है।
कैसे किया अध्ययन
वैज्ञानिकों की टीम ने नई तकनीकों के जरिए एकल कोशिका विश्लेषण के आधार पर प्राइमेट की हर प्रजाति के लिए एक ब्रेन मैप बनाया। इसके लिए मस्तिष्क के मध्य टेंपोरल गाइरस के लिए गए नमूनों से बनाए गए ब्रेन इनिशिएटिव सेल सेंसस नेटवर्क (बीआइसीसीएन) डेटाबेस का प्रयोग किया गया। टेंपोरल गाइरस के क्रॉस प्राइमेट सिंगल सेल एटलस में लगभग पांच लाख, 70 हजार कोशिकाएं होती हैं। इनसे प्राइमेट के मस्तिष्क विकास, विचलन, जीवन और बीमारी से जुड़ी बातों के बारे में पता चलता है।
संज्ञानात्मक विकास में भिन्नता
शोधकर्ताओं ने प्राइमेट समूहों में 139 जीन खोजे, लेकिन इनमें मानव मस्तिष्क में अभिव्यक्ति की भिन्नता सबसे अधिक नजर आई। इन जीनों ने उत्परिवर्तनों का मुकाबला करने के लिए मजबूती हासिल की होगी। इससे लगता है कि ये जीन चयनात्मक दबाव में विकसित हुए हैं। अध्ययन के मुख्य लेखक और शोध सहयोगी हम्सिनी सुरेश ने कहा, मनुष्यों में जीन्स को परिवर्तन के प्रति सहनशील होना चाहिए। यही परिवर्तन मानव मस्तिष्क में तेजी से विकासवादी परिवर्तन की ओर संकेत करता है।