Highlights रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) का कहना है कि कोरोना की सुरक्षित वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) बना ली गई है। (WHO) का कहना है कि उसके पास अभी तक रूस के जरिए विकसित किए जा रही कोरोना वैक्सीन की जानकारी नहीं है।
पेरिस। रूस अपनी कोरोना वायरस (Corona Vaccine) वैक्सीन को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रहा है। ऐसा लग रहा है कि रूस ने कोविड-19 (Covid-19) की वैक्सीन 'स्पुतनिक V' बनाकर बाजी मार ली है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) भी अपनी तरफ से कई घोषणाएं कर रहे हैं। उनका कहना है कि हमने एक सुरक्षित वैक्सीन बना ली है और इसे देश में रजिस्टर्ड भी करा लिया है। वे इस दवा से इतने आश्वस्त है कि उन्होंने अपनी बेटी को यह वैक्सीन लगवाई है।
इस उपलब्धी को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ओर से ऐसा कोई बयान सामने नहीं आया है। हालांकि WHO ने रूस को वैक्सीन के मामले में जल्दबाजी न दिखाने के की सलाह दी है। उसने इस रवैये को बेहद खतरनाक बताया है। रूस ने अपनी इस वैक्सीन का नाम अपने पहले सैटेलाइट 'स्पुतनिक V' के नाम पर रखा है। रूस का कहना है कि इस वैक्सीन के 1 अरब डोज के लिए 20 से अधिक देशों से निवेदन मिल चुका है।
टेस्टिंग संबंधी कोई जानकारी साझा नहीं की
वहीं WHO का कहना है कि रूस ने उनके साथ वैक्सीन टेस्टिंग संबंधी कोई जानकारी साझा नहीं की है। WHO को वैक्सीन के तीसरे चरण की टेस्टिंग पर संशय है। संगठन के प्रवक्ता क्रिस्टियन लिंडमियर का कहना है कि अगर किसी वैक्सीन का तीसरे चरण का ट्रायल किए बगैर ही इसके उत्पादन के लिए लाइसेंस जारी किया जाता हैै, तो ये खतरनाक साबित हो सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि इस तरह से अगर उत्पादन शुरू होता है तो अन्य देश भी इसकी नकल कर सकते हैं। दवा के सभी ट्रायल का होना बहुत जरूरी है। ऐसे कई देश है जहां पर वैक्सीन को तैयार करने की प्रक्रिया में कुछ ट्रायल रह गए हैं। अगर सभी देश इस परिपाटी पर चलने को तैयार हो गए तो ये घातक सिद्ध होगा। पिछले हफ्ते विश्व स्वास्थ्य संगठन ने रूस से आग्रह किया था कि वो कोरोना की रोकथाम के लिए वैक्सीन बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइन का पालन करे।
स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर मंजूरी मिल चुकी है
इस वैक्सीन को रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर मंजूरी मिल चुकी है। माना जा रहा है कि रूस में जल्द बड़े पैमाने पर लोगों को इस वैक्सीन को देने की प्रक्रिया शुरू होगी। हालांकि रूस ने जिस तेजी से इसे बनाया है, उसे लेकर वैज्ञानिक जगत हैरान है। उसने चिंताएं भी जताई हैं। इस वैक्सीन को रक्षा मंत्रालय और गामालेया नेशनल सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एपिडिमियोलॉजी एंड माइक्रोबायलॉजी ने मिलकर तैयार किया है। सितंबर तक इसक उत्पादन शुरू होने की संभावना है।