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नाइजीरिया: डाकुओं को हिंसा छोड़ने के लिए AK-47 के बदले मिलती हैं दो गायें

Highlights इस योजना से डाकू लूटमार की जिंदगी को छोड़कर एक जिम्मेदार नागरिक बनने की कोशिश करते हैं। इन डाकुओं के गिरोह में अधिकतर फुलानी हेरडर समुदाय से जुड़े हुए लोग हैं जो गायों को बहुत अहमियत देते हैं।

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अबूजा। अफ्रीकी देश नाइजीरिया की जंफारा स्टेट की सरकार ने यहां पर फैली दहशत को कम करने के नया उपाय निकाला है। यहां पर डाकुओं का आतंक है। इन्हें आत्मसमर्पण कराने की योजना के तहत एक योजना पेश की गई है। इसके तहत जो भी डाकू एके-47 रायफल के साथ आत्मसमर्पण करेगा, उसे जीविका चलाने के लिए दो गायें दी जाएंगी। स्थानीय सरकार का कहना है कि इस योजना से डाकू लूटमार की जिंदगी को छोड़कर एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में सामान्य जीवन जीने के लिए प्रेरित होगा।

गायों को ज्यादा महत्व देते हैं डाकुओं के समुदाय

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नाइजीरिया का यह राज्य मोटरसाइकिल सवार इन डाकुओं के बेहत आतंकित है। यहां पर आए दिन लूटमार घटनाएं सामने आती है। यह स्थानीय नागरिकों की हत्या तक कर देते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इन डाकुओं के गिरोह में अधिकतर फुलानी हेरडर समुदाय से जुड़े हुए लोग हैं जो गायों को बहुत अहमियत देते हैं। हालांकि इस समुदाय के लोग इन सभी आरोपों को नकाते हैं। उनका कहना है कि वे भी इनसे उतना ही पीड़ित हैं जितने कि दूसरे समुदाय के लोग।

गायों से महंगा है एके-47 रायफल

इस क्षेत्र में एक गाय की औसत कीमत एक लाख नायरा (19000 रुपये) होती है। जबकि ब्लेक मार्केट में एक एके-47 की कीमत लगभग 5 लाख नायरा ( 96 हजार रुपये) है। जंफारा के गवर्नर बेल्यू माटावल्ले का कहना है कि इन डाकूओं ने शुरुआत में बंदूकें खरीदने के लिए अपनी गायों को बेच दिया था। अब ये वापस अपनी जिंदगी में लौटना चाहते हैं। ऐसे में उन्हें दो गायें उपहार में दी जा रही हैं।

इन अपराधों को अंजाम देते हैं डकैत

इस क्षेत्र में ये डाकू घने जंगलों में रहते हैं जो आसपास के समुदायों में लूटमार करते हैं। ये दुकानों को लूटते हैं, पशुओं और अनाजों को चुरा लेते हैं। ये लोगों पहले बंधक बनाते है फिर फिरौती वसूलते हैं। जंफारा में हाल में ही हुए एक हमले में डाकुओं ने 21 लोगों को मार दिया था।

एक दशक में 8 हजार से अधिक की मौत

इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के अनुसार, बीते एक दशक में नाइजीरिया के केबी, सोकोतो, जंफारा और पड़ोसी देश नाइजर के राज्यों में 8 हजार से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया। यहां पर दो गुटों के बीच भिड़त देखी गई। ये स्थानीय फुलानी चरवाहों और कृषक समुदायों के बीच संसाधनों पर दशकों से चली आ रही प्रतिस्पर्धा का फल है। हालांकि स्थानी सरकार का कहना है कि सेना के सहयोग से यहां पर डाकुओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई भी गई है।

Updated on:
18 Jul 2020 11:36 am
Published on:
18 Jul 2020 11:34 am
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