मुरादाबाद

Reality check: इस जिले में 162 स्कूलों में जान हथेली पर रखकर पढ़ रहे नौनिहाल

टीम पत्रिका ने जनपद के खस्ताहाल स्कूलों की पड़ताल की तो तो ऐसे 200 से ज्यादा स्कूल हैं जिनकी बिल्डिंग खस्ताहाल है।
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Updated: 5 Aug 2018, 9:48 AM IST
moradabad
Reality check: इस जिले में 162 स्कूलों में जान हथेली पर रखकर पढ़ रहे नौनिहाल

जय प्रकाश@पत्रिका

मुरादाबाद: बीते दो सप्ताह से अधिक समय से जारी मानसूनी बारिश ने जहां अब जनजीवन प्रभावित किया है। वहीँ इसने सरकारी सिस्टम की भी पोल खोल दी है कि आखिर उसकी बारिश से निपटने की तैयारियां कितनी ढीली थी। इस बारिश ने शिक्षा विभाग की भी पोल खोलदी है। जी हां दस दिनों के अंदर दो स्कूलों की छत ढह गयी,जिसमें एक छात्र गंभीर रूप से घायल हुआ जबकि एक छत उस वक्त गिरी थी जब स्कूल बंद था। वरना हादसा कितना भयावह हो सकता था अंदाजा लगाना मुश्किल होता। वहीँ टीम पत्रिका ने जनपद के खस्ताहाल स्कूलों की पड़ताल की तो तो ऐसे 200 से ज्यादा स्कूल हैं जिनकी बिल्डिंग खस्ताहाल है। जब शिक्षा विभाग के अधिकारीयों से बात की गयी तो उन्होंने भी ऐसे 162 स्कूल चिन्हित करने की बात कही है। लेकिन कई स्कूलों में जर्जर इमारत होने के बाद भी बच्चे उसमें बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं।

दो स्कूलों की गिर गयी छत

बारिश के मौसम में मझोला क्षेत्र स्थित चौधरपुर प्राथमिक विद्यालय की छत व भगतपुर के गांव में स्कूल की छत गिर चुकी है। बच्चों के पढने के लिए मुफीद नहीं रहें जर्जर स्कूलों में किसी भी दिन कोई बड़ा हादसा हो सकता है। खुद शिक्षा विभाग के अधिकारी भी मान रहें है की 162 जर्जर हालत वाले स्कूलों में हादसों का डर बना हुआ है। वावजूद इसके अभी तक इन स्कूलों की मरम्मत करने या बच्चों को दूसरे स्कूलों में शिफ्ट करने को लेकर अधिकारियों ने कोई तैयारी नहीं कि है। बारिश के मौसम में मामूली बरसात में जर्जर हो चुके इन स्कूलों की छत टपकना शुरू हो जाती है। ज्यादातर जर्जर स्कूलों में दीवारों पर बड़ी-बड़ी दरारें नजर आती है और कई स्कूलों में तो दीवारें बरसात के पानी की वजह से धंसना शुरू हो गयी है।

ये बोले अधिकारी

वहीँ जब बेसिक शिक्षा अधिकारी योगेन्द्र कुमार से बार की गयी तो उन्होंने बताया कि 162 स्कूल जर्जर हालत में है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गयी है,जबकि 55 अति जर्जर स्कूलों के लिए प्रधानमंत्री कल्याण योजना से बजट मांगा गया है। लेकिन वो ये नहीं बता पाए कि आखिर इतनी जर्जर हालत में पहुंचने के बाद ही विभाग को क्यों सुध आई। वो भी कई हादसों के बाद।

हादसों से नहीं लिया सबक

यहां बता दें कि बीते सत्र में मूंडापाण्डेय के हिरनखेरा गांव में स्कूल की चारदीवारी गिर गयी थी जिसमें एक छात्र की मौत हो गई। उस वक्त भी प्राथमिक स्कूलों की बिल्डिंग के खस्ताहाल होने का सवाल उठा था जो आज भी कायम है।

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5 Aug 2018, 9:48 AM IST
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