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मुरादाबाद साइबर ठगी का बड़ा खुलासा: नेपाल में बैठकर Wi-Fi कॉल से 52 शहरों में चलाते थे नेटवर्क

Moradabad News: मुरादाबाद में 1.64 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने 1100 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। जांच में नेपाल से Wi-Fi कॉल, टेलीग्राम और ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर 14 राज्यों के 52 शहरों में ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा हुआ है।
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मुरादाबाद साइबर ठगी का बड़ा खुलासा | AI Generated Image

Moradabad Cyber Fraud: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में हैंडीक्राफ्ट कारोबारी से 1.64 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 1100 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, इस मामले में गिरफ्तार आरोपितों का नेटवर्क केवल मुरादाबाद तक सीमित नहीं था, बल्कि देश के 14 राज्यों के 52 शहरों में साइबर ठगी की वारदातों से जुड़ा था। पुलिस की जांच में नेपाल में बैठकर ठगी करने, टेलीग्राम के जरिये नेटवर्क चलाने और बिना सिम वाले मोबाइल से संपर्क करने जैसे तरीके सामने आए हैं।

नेपाल से संचालित होता था नेटवर्क

जांच के दौरान पता चला कि गिरोह के सदस्य नेपाल में रहकर लोगों को ऑनलाइन ट्रेडिंग और शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर अपने जाल में फंसाते थे। वे लोगों को कम समय में कई गुना कमाई और मोटा मुनाफा मिलने का लालच देते थे। शुरुआत में पीड़ितों को छोटी रकम पर मुनाफा दिखाया जाता था, ताकि उनका भरोसा जीता जा सके। जब लोग इस व्यवस्था पर विश्वास करने लगते, तो उनसे धीरे-धीरे बड़ी रकम निवेश के नाम पर जमा कराई जाती थी।

टेलीग्राम से जुड़ते थे ठग

पुलिस की जांच में उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों के लोगों के इस नेटवर्क से जुड़े होने की बात सामने आई। गिरोह के सदस्य टेलीग्राम के जरिये एक-दूसरे के संपर्क में रहते थे। इसी माध्यम से उनके बीच बातचीत और नेटवर्क से जुड़ाव बनाए रखने की जानकारी मिली। जांच में खिलाफत नाम की टेलीग्राम आईडी का भी जिक्र सामने आया, जिसके जरिये आरोपितों के जुड़े होने की बात पुलिस को पता चली।

बिना सिम वाले मोबाइल से कॉल

साइबर ठगी के इस नेटवर्क की एक खास बात यह थी कि आरोपित पकड़े जाने से बचने के लिए बिना सिम वाले मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते थे। वे नेपाल के होटलों में उपलब्ध वाई-फाई कनेक्शन के जरिये लोगों को व्हाट्सएप कॉल करते थे। इस तरीके से वे पीड़ितों से संपर्क साधते और ऑनलाइन ट्रेडिंग में निवेश करने के लिए मनाते थे। पुलिस की जांच में सामने आए इन तरीकों ने ठगी के नेटवर्क के काम करने के तरीके को उजागर किया।

मुनाफे का लालच देकर फंसाते थे

गिरोह के सदस्य शुरुआत में पीड़ितों को कुछ हजार रुपये का मुनाफा दिलाकर भरोसा कायम करते थे। इसके बाद अलग-अलग स्कीम और आकर्षक ऑफर बताकर उनसे और अधिक रकम निवेश करने के लिए कहा जाता था। जब पीड़ित बड़ी रकम जमा कर देते, तो उनके साथ करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी कर ली जाती थी। मुरादाबाद के कारोबारी के मामले में भी इसी तरह निवेश के नाम पर 1.64 करोड़ रुपये ठगे जाने का आरोप है।

ठगी की रकम के लिए म्यूल अकाउंट

पुलिस की जांच में ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए म्यूल अकाउंट यानी दूसरों के बैंक खातों का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई। आरोप है कि कुछ खाताधारकों को सरकारी योजनाओं से जुड़ी रकम मिलने की बात बताकर खातों में पैसा डलवाया जाता था। इसके बाद खाताधारकों को थोड़ी रकम देकर शेष पैसे निकलवाए जाते थे। इस तरीके से ठगी की रकम को आगे पहुंचाने में अलग-अलग लोगों और बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था।

जुलाई 2025 में कारोबारी को बनाया निशाना

विवेचना के अनुसार, साइबर ठगों ने जुलाई 2025 में मुरादाबाद के हैंडीक्राफ्ट कारोबारी से व्हाट्सएप के जरिये संपर्क किया था। आरोपितों ने उन्हें ऑनलाइन ट्रेडिंग शुरू करने के लिए एक लिंक भेजा। शुरुआती दौर में कारोबारी को कुछ हजार रुपये का मुनाफा भी दिया गया, जिससे उन्हें निवेश की योजना पर भरोसा होने लगा। इसके बाद अलग-अलग तारीखों पर स्कीम और ऑफर के नाम पर उनसे रकम जमा कराई गई। इस तरह कारोबारी से कुल 1.64 करोड़ रुपये की ठगी किए जाने का मामला सामने आया।

शिकायत के बाद शुरू हुई जांच

रकम गंवाने के बाद कारोबारी ने अज्ञात आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की तो ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों की जानकारी खंगाली गई। जांच के दौरान म्यूल अकाउंट के एक खाताधारक के जरिये पुलिस को नेपाल से जुड़े नेटवर्क के बारे में सुराग मिला। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और आरोपितों तक पहुंचने के लिए अलग-अलग पहलुओं पर काम किया गया।

सीसीटीवी फुटेज से मिला सुराग

पुलिस ने आरोपितों की पहचान के लिए उनके हुलिये और कई दिनों की सीसीटीवी फुटेज के आधार पर छानबीन की। जांच के दौरान मुरादाबाद के नाजिम अली तक पुलिस पहुंची और उसे गिरफ्तार किया गया। उससे पूछताछ के बाद गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी मिली। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में टेलीग्राम आईडी के जरिये जुड़े साथियों का सुराग मिला, जिसके बाद कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।

आठ आरोपितों की गिरफ्तारी

पुलिस ने इस मामले में कुल आठ आरोपितों को गिरफ्तार किया था। जांच के अनुसार, सभी पर साइबर ठगी के नेटवर्क में शामिल होने और अलग-अलग भूमिकाओं में काम करने का आरोप है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान आरोपितों ने वारदात में अपनी भूमिका और ठगी के तरीके के बारे में जानकारी दी। मामले की विवेचना के बाद अब 1100 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई है, जिसमें जांच के दौरान सामने आई वारदातों और नेटवर्क से जुड़े तथ्यों का विवरण शामिल है।