समय से चीनी मिलें चालू न होने व बकाया भुगतान की मांगों को लेकर किसानों ने बंद कर दिया डीएम ऑफिस का गेट तो फिर
रामपुर। चीनी मिलों के चालू न होने व बकाया रुपया भुगतान की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के आव्हान पर किसानों ने कलेक्ट्रेट के गेट के सामने गन्ना डालकर गेट बंद कर दिया। जिसको देखकर डीएम गुस्से में आ गए। डीएम बोले कि पुलिस मेरे कलेक्ट्रेट का गेट खुलवाने में सक्षम नहीं है तो फिर में वापस घर जा रहा हूं। ऑफिस में बैठकर कोई काम नहीं करूंगा। इस दौरान किसान बोले डीएम साहब गेट बंद तो भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश टिकैत ने करवाया है। इस पर डीएम साहब का पारा चढ़ा तो उन्होंने बोला कि इन किसानों की वीडियो ग्राफी करवाओ। मैं एसपी को बुलाता हूं और फोर्स मंगवाता हूं।
किसानों ने दो टूक कह दिया कि अगर आपको गाड़ी अंदर लेकर जानी है तो आप हमारे ऊपर चढ़ा दो लेकिन गेट खुलने पर पहले हम अंदर जाएंगे और अपना धरना करेंगे। डीएम बोले जाओ लेकिन गन्ना लेकर नहीं। हालांकि बाद में डीएम ने कह दिया कि तुम गन्ना रखकर अपना प्रदर्शन कर लो। लेकिन इस दौरान किसानों की पुलिस के दरोगा और कांस्टेबलों से तीखी झड़पें हुईं। किसान नेता ने एक दरोगा को हाथ पकड़ कर गन्ने से अलग कर दिया। दरअसल पुलिस डीएम के कहने से गेट पर पड़ा गन्ना हटा रही थी, जबकि किसान मना कर रहे थे। दरअसल गुरुवार की रात किसानों ने गेट पर गन्ना रखकर गेट बंद कर दिया था। सुबह 9 बजे के बाद जिले के अधिकारी अपने कार्यालय जाते थे। लेकिन गेट बंद होने के कारण उस रास्ते पर किसानों से टकराने के लिए कोई नहीं आया।
आधे घण्टे की कड़ी मशक्कत के बाद डीएम बोले कि आप खाली ड्रामा कर रहे हैं, मैंने बता दिया हैकि मिलें जल्द चालू होंगी। मिलों पर किसानों का बकाया है उसे भी जल्द दिलवाया जाएगा। आपको अगर फिर भी प्रदर्शन करना है तो आप करें आपको रोका किसने है। इसके बाद किसान अपने गन्ने को कलेक्ट्रेट के अंदर ले गए, जहां उन्होंने अपना तंबू लगाकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। किसानों के मुताबिक उनका 125 करोड़ रुपया चीनी मिलों पर बकाया है, उसे दिलाया जाए। साथ ही जल्द मिलें चालू कराई जाएं ताकि किसानों का गन्ना मिलों पर समय से जा सके। आपको बात दे कि डीएम महेंद्र बहादुर सिंह का एक दिन पहले ही आजम खान से भी टकराव हुआ था, लेकिन इसके अगले ही दिन उनका किसानों से भी टकराव हो गया।