
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
मुरादाबाद। छजलैट प्रकरण में आरोपी चार विधायकों समेत सात नेताओं को मुरादाबाद कोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए केस वापसी की अर्जी को खारिज कर दिया है। जिसके बाद अब मामले को लेकर हाईकोर्ट में अर्जी डालने की बात कही जा रही है। दरअसल, एमपी-एमएलए की विशेष कोर्ट एडीजे पुनीत कुमार गुप्ता ने इस मामले में सुनवाई की। वहीं यूपी सरकार की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता मुनीश भटनागर व एडीजीसी कौशल गुप्ता ने मामले की पैरवी की।
बचाव पक्ष की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शील भटनागर, वीरेन्द्र शर्मा अधिवक्ताओं ने शासनादेश व कानूनी तर्कों को कोर्ट में प्रस्तुत किया। जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने बचाव पक्ष की सारी दलीलों को खारिज कर प्रार्थना पत्र को नामंजूर कर दिया। इस मामले में जानकारी देते हुए अधिवक्ता एम जलालुद्दीन ने बताया कि आठ दिसंबर को विशेष अदालत ने केस वापसी की अर्जी को खारिज कर दिया है। अब इसके लिए हाईकोर्ट में अपील की जाएगी।
ये है पूरा मामला
बता दें कि दो जनवरी 2008 में बसपा सरकार के दौरान रामपुर से सपा विधायक रहे आजम खान की गाड़ी की पुलिस ने तलाशी ली थी। जिसके बाद सपाइयों ने हाइवे जाम कर जमकर बवाल काटा था। पुलिस ने हाईवे जाम करने के मामले में कुल नौ लोगों के खिलाफ छजलैट थाने में मुकदमा दर्ज किया था। इनमें सपा सांसद आजम, मुरादाबाद देहात से विधायक हाजी इकराम कुरैशी, अमरोहा से महबूब अली, नगीना से मनोज पारस, नहटौर के नईमुल हसन के अलावा नेता राजेश यादव, डीपी यादव व राज कुमार प्रजापति का नाम शामिल है। वर्ष 2012 में तत्कालीन अखिलेश सरकार द्वारा मुकदमा वापसी के लिए सिफारिश भेजी गई थी। साथ ही आरोपितों की ओर से भी कोर्ट में इसी सिफारिश पर विचार करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया था।