रामगंगा नदी खतरे के निशान पर पहुंच गयी है। जिसके बाद नदी से सटे इलाकों के रहने वालों में दहशत बढ़ गयी है
मुरादाबाद:बीते कई दिनों से उत्तराखंड और मैदानी इलाकों में जारी बारिश से नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। वहीँ महानगर से बहने वाली रामगंगा नदी खतरे के निशान पर पहुंच गयी है। जिसके बाद नदी से सटे इलाकों के रहने वालों में दहशत बढ़ गयी है कि अगर पानी और बढ़ा तो बाढ़ का संकट तय है। यही नहीं अभी शहर के निचले इलाकों की कुछ बस्तियों में पानी भर गया है। प्रशासन ने नदी की स्थिति देख अलर्ट जारी किया गया है और सभी प्रशासनिक अधिकारीयों से आपात स्थिति में निपटने के लिए व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए हैं।
ऐसे बढ़ा जलस्तर
रामगंगा का जल स्तर पहले सही काफी बढ़ा हुआ चल रहा था,लेकिन बुधवार सुबह से अचानक बढना शुरू हुआ जो गुरूवार रात तक खतरे के निशान के करीब पहुंच गया। गुरूवार दोपहर तक शहर के जिगर कालोनी,नबाबपुरा,दसवां घाट,काली मंदिर,जामा मस्जिद,वारसी नगर,सूरज नगर और कई मोहल्लों में पानी गलियों में घुस चुका है। जिससे लोग सहम गए हैं और जरूरत का सामान सुरक्षित जगह पहुंचाना शुरू कर दिया है। उधर रामगंगा का पानी काशीपुर रोड पर इस्लाम नगर गांव के पास बीच सड़क से होकर बह रहा है। और काफी तेज बहाव है।
अलर्ट जारी
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने बाढ़ का अलर्ट जारी किया है। डीएम राकेश कुमार सिंह बताया कि अलर्ट जारी किया गया है। लेकिन अभी खतरे जैसी स्थिति नहीं है। फिर भी अधिकारीयों को साड़ी व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं। नदी की निगरानी 24 घंटे बढ़ा दी गयी है।
पिछली बाढ़ को याद कर सहमे लोग
लोगों को निचले इलाकों से निकलने की सलाह दी गयी है साथ ही उनके रुकने के लिए स्कूल और अस्पताल में व्यवस्था की गयी है। यहां बता दें कि वर्ष 2010 में शहर में भीषण बाढ़ आई थी। जिसमें आधा शहर डूब गया था। रामगंगा नदी से सटे इलाकों में छह फुट से आठ फुट तक पानी भर गया था। जिसके बाद इस साल नदी के पानी ने सटे इलाकों में दस्तक दी है। जिससे लोग घबरा गये हैं कि कहीं वो ही नजारा न हो जाए।