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राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों की सियासी छलांग: सपा का बड़ा वार- डर, दबाव और डील का पूरा खेल

AAP MPs join BJP: AAP के कई राज्यसभा सांसदों के BJP में शामिल होने पर सियासत गरमा गई है। सपा नेता एस. टी. हसन ने इसे वफादारी के खिलाफ बताते हुए BJP पर ‘वॉशिंग मशीन’ राजनीति और जांच एजेंसियों से बचने के आरोप लगाए हैं।

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राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों की सियासी छलांग..

ST Hasan Statement: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से एक बड़ा सियासी बयान सामने आया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा समेत छह अन्य सांसदों के पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने को लेकर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एस. टी. हसन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी ने किसी नेता को ऊंचाई तक पहुंचाया, उसके प्रति वफादारी निभाना जरूरी होता है, लेकिन आज की राजनीति में यह मूल्य तेजी से खत्म होते जा रहे हैं।

वफादारी पर उठे सवाल

एस. टी. हसन ने अपने बयान में कहा कि राजनीति का स्तर इतना गिर चुका है कि लोग अपने व्यक्तिगत फायदे के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। उन्होंने इशारों-इशारों में उन नेताओं पर सवाल उठाए जो अचानक पार्टी बदल लेते हैं और अपने पुराने साथियों को छोड़ देते हैं। उनके मुताबिक, यह प्रवृत्ति लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है और इससे जनता का विश्वास भी कमजोर होता है।

BJP पर ‘वॉशिंग मशीन’ वाली राजनीति का आरोप

सपा नेता ने बीजेपी पर भी सीधा हमला बोलते हुए कहा कि यह पार्टी अन्य दलों को तोड़कर अपने में शामिल करने का पुराना इतिहास रखती है। उन्होंने इसे ‘वॉशिंग मशीन’ की राजनीति करार दिया, जहां दूसरे दलों के नेता BJP में शामिल होते ही ‘साफ-सुथरे’ नजर आने लगते हैं। उनका कहना है कि इस तरह की राजनीति से राजनीतिक नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

ED और इनकम टैक्स से बचने का लगाया आरोप

हसन ने यह भी आरोप लगाया कि BJP में शामिल होने वाले कुछ नेता जांच एजेंसियों से बचने के लिए ऐसा कदम उठाते हैं। उनके अनुसार, कुछ लोग प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग की कार्रवाई से बचने के उद्देश्य से पार्टी बदलते हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक रणनीति नहीं बल्कि खुद को बचाने की कोशिश भी हो सकती है।

बगावत या मजबूरी? सियासत में नए सवाल

उन्होंने आगे कहा कि इन नेताओं का यह कदम एक तरह की बगावत है, जिसका मकसद BJP के दबाव या कार्रवाई से खुद को सुरक्षित रखना हो सकता है। इस पूरे घटनाक्रम ने भारतीय राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।