पूर्व मंत्री काजिम अली खान उर्फ नवेद मियां के बेटे नवाबजादे हैदर अली खान ने आजम खान पर लगाया बड़ा आरोप
रामपुर. सपा के कद्दावर नेता आजम खान जहां जौहर विश्वविद्यालय की जमीन को लेकर मुश्किलों में घिरे हैं। वहीं अब पूर्व मंत्री काजिम अली खान उर्फ नवेद मियां के बेटे नवाबजादे हैदर अली खान उर्फ हमजा मियां ने प्रेसवार्ता कर उनके लिए नई मुसिबत खड़ी कर दी है। हमजा मियां ने आरोप लगाते हुए कहा है कि जौहर विश्वविद्यालय परिसर में जो बंगला है उसके नीचे कई सौ साल पहले नवाबों ने राम मंदिर बनवाया था, लेकिन आजम खान ने सत्ता के बल पर राम मंदिर के स्थान पर बंगला बनवा लिया। आज भी वहां मंदिर के निशान हैं।
उल्लेखनीय है कि जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर जिला प्रशासन, शासन, उपमुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल और केंद्र सरकार तक से शिकायत की गई है। जौहर यूनिवर्सिटी में बिजली, जल निगम, लोक निर्माण विभाग आदि का पैसा लगा होने की शिकायत कर जांच कराने की मांग की गई। इस पर अलग-अलग माध्यमों से शासन ने प्रशासन से रिपोर्ट तलब की। यह बात दीगर है कि अब तक किसी मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है, लेकिन घेराबंदी बराबर की जा रही है। अब ये सभी मामले प्रदेश सरकार ने एसआईटी को सौंप दिए हैं। प्रदेश सरकार में मंत्री बलदेव सिंह औलख ने बताया कि एसआईटी जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। वहीं विवि के कुलाधिपति आजम खां का कहना है कि तालीम के दुश्मन साजिश रच रहे हैं, हमने नियम विरुद्ध कोई काम नहीं किया है। अब इस पर पूर्व मंत्री काजिम अली खान उर्फ नवेद मियां के बेटे नवाबजादे हैदर अली खान उर्फ हमजा मियां ने प्रेसवार्ता कर उनके लिए नई मुसिबत खड़ी कर दी है। हमजा मियां ने आरोप लगाया है कि जौहर विश्वविद्यालय परिसर में जो बंगला है उसके नीचे कई सौ साल पहले नवाबों ने राम मंदिर बनवाया था, लेकिन आजम खान ने सत्ता के बल पर राम मंदिर के स्थान पर बंगला बनवा लिया है। आज भी वहां मंदिर के निशान हैं।
इधर, आजम खान ने एसआइटी जांच कराए जाने पर सपा नेता आजम खां ने कहा कि किसी कम पढ़े लिखे आदमी ने शिकायत की होगी। उसे पता ही नहीं होगा कि सरकार ने ही यह इमारत 99 साल के लिए लीज पर दी है। वहीं मदरसों में ड्रेस कोड और एनसीईआरटी की किताबें लागू करने के बयान पर कहा कि यह आधी बात हुई, अगर ड्रेस कोड लागू न हुआ और मदरसों ने लागू नहीं किया तो सजा क्या होगी? हर जुर्म की सजा भी डिक्लेयर करते चलें, ताकि एक बार फिर बहस में आ जाए कि इंदिरा गांधी की इमरजेंसी क्या थी और नरेंद्र मोदी की इमरजेंसी क्या है।