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हर हथकंडा अपनाकर सत्ता में बने रहना चाहती है सरकार, परिसीमन और राम मंदिर दान मामले पर एसटी हसन का हमला

Moradabad News: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. एसटी हसन ने परिसीमन प्रक्रिया और अयोध्या राम मंदिर दान गबन मामले को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि SIT रिपोर्ट तैयार होने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट में पेश करने में हो रही देरी संदेह पैदा करती है।
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st hasan on delimitation ayodhya ram temple donation row

राम मंदिर दान मामले पर एसटी हसन का हमला

ST Hasan Statement: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन ने परिसीमन (Delimitation) को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने राजनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए हर संभव तरीका अपनाने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि परिसीमन की प्रक्रिया के जरिए विपक्षी दलों के वोटों को विभाजित करने की रणनीति बनाई जा रही है, ताकि सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत रखी जा सके।

विपक्ष को कमजोर करने की हो रही कोशिश

डॉ. एसटी हसन ने कहा कि मौजूदा सरकार किसी भी कीमत पर अपने राजनीतिक लक्ष्य हासिल करना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों की ताकत को कमजोर करने और चुनावी समीकरण बदलने के लिए परिसीमन का इस्तेमाल किया जा सकता है। उनके अनुसार सरकार सत्ता में बने रहने के लिए हर संभव हथकंडा अपनाने से पीछे नहीं हटेगी और इसी रणनीति के तहत विपक्ष के वोट बैंक को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है।

राम मंदिर दान गबन मामले पर भी उठाए सवाल

अयोध्या राम मंदिर दान गबन मामले को लेकर भी एसटी हसन ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यदि इस मामले में विशेष जांच दल (SIT) अपनी रिपोर्ट पहले ही तैयार कर चुका है, तो उसे अब तक अदालत में दाखिल क्यों नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट पेश करने में हो रही देरी कई तरह के सवाल पैदा करती है और इससे लोगों के मन में संदेह उत्पन्न होना स्वाभाविक है।

रिपोर्ट में छेड़छाड़ की आशंका से इनकार नहीं

एसटी हसन ने कहा कि जिस तरह से तैयार रिपोर्ट को पेश करने में लगातार देरी हो रही है, उससे यह आशंका पैदा होती है कि कहीं रिपोर्ट के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ तो नहीं की गई। उन्होंने कहा कि अब जब सुप्रीम कोर्ट ने रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा है, तब भी देरी समझ से परे है। यदि रिपोर्ट पहले से तैयार है तो उसे बिना किसी विलंब के सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष पेश किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बढ़ी निगाहें

एसटी हसन ने कहा कि अब पूरे मामले पर सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और सरकार की कार्रवाई पर टिकी हैं। उनका कहना है कि जांच एजेंसियों की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने मांग की कि मामले की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए तैयार SIT रिपोर्ट को जल्द से जल्द सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किया जाए, ताकि किसी भी तरह के संदेह की स्थिति समाप्त हो सके।

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