मुरादाबाद

“कुर्बानी पर सवाल उठाने वाले तथाकथित बुद्धिजीवी…”,काब रशीदी ने हिंदू संगठनों पर किया कड़ा प्रहार

Kaab Rashidi Big statement: मौलाना काब रशीदी ने बकरीद की कुर्बानी को लेकर उठी ईकोफ्रेंडली मांगों पर तीखी प्रतिक्रिया दी, इसे भेदभावपूर्ण बताते हुए धार्मिक स्वतंत्रता और सांप्रदायिक सौहार्द की अपील की।
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Updated: 3 Jun 2025, 8:08 PM IST
Kaab Rashidi
Maulana Kaab Rashidi

Kaab Rashidi on Hindu Organisations: बकरीद पर होने वाली कुर्बानी को पर्यावरण के अनुकूल (ईकोफ्रेंडली) बनाने की मांग को लेकर कुछ हिंदू संगठनों द्वारा उठाए गए मुद्दे पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के लीगल एडवाइजर मौलाना काब रशीदी ने मंगलवार को तीखी प्रतिक्रिया दी। 

प्रिवेंशन ऑफ क्रूएल्टी टू एनिमल्स एक्ट दिया हवाला 

मौलाना काब रशीदी ने कहा कि कुर्बानी पर सवाल उठाने वाले तथाकथित बुद्धिजीवी केवल मुसलमानों को निशाना बनाने के लिए सामने आते हैं, जबकि देश में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 (प्रिवेंशन ऑफ क्रूएल्टी टू एनिमल्स एक्ट) स्पष्ट रूप से धार्मिक मान्यताओं के आधार पर दी जाने वाली कुर्बानी को इस कानून के दायरे से बाहर रखता है।

मौलाना रशीदी ने क्या कहा ? 

मौलाना रशीदी ने कहा, “पार्लियामेंट ने 1960 में यह कानून बनाया था, जिसमें साफ कहा गया है कि धार्मिक उद्देश्यों के लिए पशु बलि या कुर्बानी इस अधिनियम के अंतर्गत नहीं आएगी। चाहे वह किसी भी धर्म की मान्यता हो, बलि हो या कुर्बानी, उसमें कोई कानूनी बाध्यता नहीं है। भारत आजादी के समय से इस नियम का पालन करता आ रहा है।”

अनर्गल और भेदभावपूर्ण रवैया: मौलाना काब रशीदी

उन्होंने यह भी कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों में गोहत्या को अनुमति दी गई है, क्योंकि वहां यह धार्मिक और सांस्कृतिक प्रथा का हिस्सा है। क्या सिर्फ मुसलमानों की धार्मिक प्रथाओं पर ही सवाल उठाए जाएंगे? यह अनर्गल और भेदभावपूर्ण रवैया है। उन्होंने सवाल उठाया कि कुछ लोग, जो खुद को बुद्धिजीवी कहते हैं, केवल ईद की कुर्बानी के समय ही सक्रिय क्यों होते हैं? ये लोग पूरे साल गायब रहते हैं, लेकिन जैसे ही कुर्बानी का मुद्दा आता है, इनका सारा ज्ञान जाग उठता है।”

मौलाना ने दागा सवाल 

मौलाना ने इन संगठनों से पूछा कि उन्होंने देश में चल रही चमड़े की फैक्ट्रियों को बंद कराने के लिए क्या किया? क्या पशुओं की हड्डियों से दवाइयां नहीं बन रही हैं? क्या भारत मांस निर्यात (मीट एक्सपोर्ट) में दुनिया के शीर्ष पांच देशों में शामिल नहीं है? इन फैक्ट्रियों के मालिक कौन हैं, क्या इस पर कभी बात होती है?”

मौलाना ने आपसी समझ को बढ़ावा देने की अपील की 

उन्होंने जोर देकर कहा कि कुर्बानी इस्लाम का एक अभिन्न हिस्सा है और इसे पर्यावरण के नाम पर सांकेतिक बनाने की मांग मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं पर प्रहार है। जब संसद ने कानून बनाकर धार्मिक प्रथाओं को मान्यता दी है, तो बार-बार इस तरह के मुद्दे उठाना केवल मुसलमानों को निशाना बनाने और इस्लाम पर हमला करने की साजिश है। धार्मिक मामलों में अनावश्यक विवाद पैदा करना देश के सौहार्द के लिए हानिकारक है। ऐसे में मैं समाज से एकता और आपसी समझ को बढ़ावा देने की अपील करता हूं।

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3 Jun 2025, 8:08 PM IST
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