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बकरीद 2025: कुर्बानी को लेकर मौलाना फरंगी महली ने कही बड़ी बात, लोगों से की ये अपील

Eid-Ul-Adha 2025: इस्लाम धर्म का प्रमुख पर्व ईद-उल-अजहा (बकरीद) इस वर्ष 7 जून 2025 को मनाया जाएगा। इसमें त्योहार के दौरान धार्मिक गरिमा बनाए रखने और सामाजिक सौहार्द्र का विशेष ध्यान रखने की अपील करते हुए मौलाना फरंगी महली ने लोगों से अपील की है।

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लखनऊ

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Prateek Pandey

Jun 02, 2025

PC: ANI Video

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Eid-Ul-Adha 2025: उत्तर प्रदेश के मरकजी सुन्नी चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने ईद-उल-अजहा 2025 के लिए 12 बिंदुओं की सलाह जारी की है। इसमें उन्होंने कई बातों का जिक्र किया है।

ईद-उल-अजहा (बकरीद) पर मरकजी सुन्नी चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने त्योहार को शांति और स्वच्छता के साथ मनाने को लेकर एक एडवाइजरी जारी की है। इसमें त्योहार के दौरान धार्मिक गरिमा बनाए रखने का खास ध्यान रखने की अपील की गई है। इस एडवाइजरी की खास बातें कुछ इस प्रकार से हैं।

एडवाइजरी की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  1. कुर्बानी केवल तय स्थानों पर करें: मौलाना खालिद रशीद ने लोगों से आग्रह किया है कि कुर्बानी केवल नगरपालिका या प्रशासन द्वारा निर्धारित स्थलों पर ही की जाए।
  2. सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी से बचें: सड़कों, गलियों या खुली जगहों पर जानवरों की कुर्बानी न की जाए, ताकि किसी को असुविधा या आपत्ति न हो।
  3. सोशल मीडिया पर फोटो/वीडियो न डालें: कुर्बानी की तस्वीरें या वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने से बचें, जिससे दूसरों की भावनाओं को ठेस न पहुंचे।
  4. साफ-सफाई का रखें विशेष ध्यान: जानवरों के खून को खुले में या नालियों में न बहाएं। उसे जमीन में दफन किया जाए और अवशेष खुले में न फेंके जाएं।
  5. जरूरतमंदों को कुर्बानी का हिस्सा दें: बकरीद के इस पावन पर्व पर समाज के गरीब और जरूरतमंद तबके तक भी त्योहार की खुशियां पहुंचें, इसका विशेष ध्यान रखा जाए।
  6. धार्मिक मर्यादा बनाए रखें: त्योहार के दौरान ऐसे कोई काम न करें, जिससे साम्प्रदायिक सौहार्द्र बिगड़े या विवाद की स्थिति बने।

इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया की इस एडवाइजरी का उद्देश्य बकरीद को परंपरा, स्वच्छता और आपसी भाईचारे के साथ मनाना है। प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है कि त्योहार को संयमित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न किया जाए। मौलाना खालिद रशीद ने कहा कि धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए त्योहार को मनाएं ताकि यह पूरी तरह से आध्यात्मिक, सामाजिक और मानवीय मूल्यों को समर्पित रहे।