महज चार साल की उम्र में पिता ने खेल खेल घोड़े की लगाम पकड़ा दी और आज ये बच्चा बिना घोड़े के रह ही नहीं सकता।
मुरादाबाद: नाम असद उम्र महज सात साल और शौक की अच्छे अच्छे के पसीने छूट जाएं। जी हां कुन्दरकी के रहने वाले सात साल के असद इन दिनों अपनी घोड़े की सवारी को लेकर सुर्खियों में हैं। महज चार साल की उम्र में पिता ने खेल खेल घोड़े की लगाम पकड़ा दी और आज ये बच्चा बिना घोड़े के रह ही नहीं सकता। घोड़े पर बैठने के साथ ही हवा से बातें करना लगता है। जिसे देख हर कोई हैरान रह जाता है।
हवा से बातें करता है असद
कुंदरकी के असद की कुशल घुड़सवारी देखकर कुंदरकी का हर एक शख्स इसके हुनर को सलाम कर रहा है। 7 वर्ष का असद कक्षा 2 का छात्र है और 4 साल की उम्र से घुड़सवारी कर रहा है। असद के ताऊ अजीज अहमद को पहले से ही घोड़े पालने का शौक है ताऊ के भरोसे ने इस बालक के कॉन्फिडेंस को और बढ़ा दिया और देखते ही देखते असद छोटी सी उम्र में कुशल घुड़सवार बन गया। घोड़े की पीठ पर बिना किसी डर के होने वाले सवार ने हमको बताया कि घुड़सवारी से उसको डर नही लगता बल्कि मजा आता है। असद को तेज रफ्तार घोड़े चलाना पसंद है। असद ने घुड़सवारी के शौक से ही आगे बढ़कर जीवन में नाम कमाने का सपना बना लिया है।
लोग हो जाते हैं हैरान
अशद के ताऊ अजीज अहमद कहते हैं जब दूर दूर से लोग इस बच्चे की घुड़सवारी को देखने के लिए कुंदरकी आते है। तो उन्हें अपने भतीजे असद और उसके हुनर पर गर्व होता है। वह चाहते हैं की असद का एडमिशन घुड़सवारी के किसी अच्छे ट्रेनिंग सेंटर में हो जाए। जिससे यह बच्चा अपने नगर अपने जिले और अपने प्रदेश का नाम रोशन कर सके।
परिजनों को भविष्य की चिंता
फ़िलहाल परिजनों के सामने असद को बेहतर ट्रेनिंग दिलाने की है। क्यूंकि कुन्दरकी में सिवाय शौक के कुछ हासिल नहीं होगा और इस तरह के खेल या ट्रेनिंग सेंटर आस पास के इलाके में हैं भी नहीं। इसलिए अब परिजन असद के घुड़सवारी के भविष्य को लेकर सरकार की ओर टकटकी लगाए हैं।