
मुरादाबाद: एक बार फिर परिजनों की लापरवाही एक बच्चे की जान पर ले आई थी, ये तो गनीमत रही कि मौके पर पहुंची पुलिस ने समझदारी वाला कदम उठाया और बच्चे को सकुशल बचा लिया। जी हां शहर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के रामगंगा विहार कालोनी में एक परिवार महिला डाक्टर के यहां इलाज के लिया आया था। वो अपने चार वर्षीय के बच्चे सलमान को गाड़ी में सोता छोडकर लाक कर डाक्टर के क्लिनिक में चली गयी। थोड़ी देर बाद जब बच्चे को घुटना महसूस हुई तो उसने आवाज दी लेकिन कार के अंदर से उसकी आवाज नहीं पहुंची फिर उसने अंदर से दरवाजा पीटना शुरू किया तो आसपास के लोग पहुंच गए और फौरन पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने सबसे पहले बच्चे की हालत को देखते हुए कार का शीशा तोड़ कर बच्चे को बाहर निकाला फिर परिजनों को बुलाकर उन्हें सुपुर्द किया।
डॉक्टर से मिलने गए थे दंपत्ति
जानकारी के मुताबिक अमरोहा के मोहल्ला चौक निवासी नजाकत अली अपनी भाभी परवीन पत्नी रियासत को उपचार के लिए रामगंगा विहार में लेकर आए थे। कार में नजाकत और उनकी भाभी अपने चार साल के बेटे सलमान को कार के शीशे बंदकर अकेला छोड़कर डाक्टर के पास चले गए। करीब दो घंटे तक भी दोनों डाक्टर के पास से नहीं आए। कार में बंद बच्चे ने बाहर निकलने के लिए जमकर शोर मचाया। शोर सुनकर आसपास के लोगों ने कार के अंदर बच्चे को देखा और रामगंगा विहार चौकी प्रभारी रामबीर राठी को सूचना दी। दारोगा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। आसपास के एरिया में अभिभावकों को तलाश किया, लेकिन उनका कुछ पता नहीं चला।
चौकी प्रभारी ने दिखाई सूझबूझ
चौकी प्रभारी रामबीर राठी ने बच्चे को अंदर बदहवास हालत में देखा तो उन्होंने देरी न करते हुए सबसे पहले कार का शीशा तोडा और बच्चे को बाहर निकाला। बच्चे का दम घुट रहा था कार के अंदर। कुछ ही देर में बच्चे के परिजन भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने अपनी गलती मानी और भविष्य में ऐसा न करने की भी बात कही।
मां ने माना हो गयी थी गलती
सलमान की मां शबनम परवीन ने कहा कि बच्चा सो रहा था तो हमने उठाना सही नहीं समझा। लेकिन इस चीज का अंदाजा नहीं था कि उसका दम घुटने लगेगा। उन्होंने पुलिस को धन्यवाद भी दिया।
पब्लिक ने की पुलिस की तारीफ
वहीँ मौके पर मौजूद लोगों ने भी पुलिस की सूझ बूझ और तत्परता की कार्यवाही की तारीफ की। अगर कुछ देर और हो जाती तो बच्चे की जान भी जा सकती थी। चौकी प्रभारी ने बताया कि जब हम पहुंचे तो बच्चा कार के अंदर छटपटा रहा था। हमने फौरन ही कार का शीशा तोडा और बच्चे को बाहर निकाला उसके बाद उसे पानी पिलवाया व उसे दुलारा ताकि उसका डर निकले। थोड़ी देर बाद जब बच्चे के माता पिता आये तो उनके सुपुर्द कर दिया गया।