
मुरादाबाद में दहशत: 2 शावकों के साथ घूम रही मादा तेंदुआ..
Leopard Terror Moradabad: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में तेंदुओं के लगातार हो रहे हमलों ने ग्रामीण इलाकों में दहशत फैला दी है। जंगल से सटे गांवों में स्थिति यह है कि लोग शाम ढलते ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं। तेंदुओं के हिंसक हमलों में अब तक एक महिला अपनी जान गंवा चुकी है, जबकि लगभग एक दर्जन ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। इस भयावह स्थिति को देखते हुए वन विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन ने पूरे इलाके में हाई अलर्ट जारी कर दिया है और व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
इलाके को सुरक्षित बनाने के लिए वन विभाग की ओर से चलाए जा रहे रेस्क्यू अभियान में शुरुआती सफलता जरूर मिली है। टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद दो तेंदुओं को पहले ही ट्रैप करके पकड़ लिया है। हालांकि, दो तेंदुओं के पकड़े जाने के बाद भी ग्रामीणों का डर कम नहीं हुआ है, क्योंकि जंगलों से सटे रिहाइशी इलाकों में अन्य तेंदुओं की आवाजाही और पंजों के निशान लगातार देखने को मिल रहे हैं।
वन विभाग द्वारा चलाए जा रहे हाई-टेक निगरानी अभियान के दौरान थर्मल स्कैनिंग कैमरों में एक बड़ा खुलासा हुआ है। कैमरों की फुटेज में एक मादा तेंदुआ अपने दो नन्हे शावकों के साथ घूमती हुई साफ दिखाई दी है। मादा तेंदुआ के साथ उसके बच्चे होने के कारण वन विभाग की चिंता और बढ़ गई है, क्योंकि शावकों की मौजूदगी में तेंदुए स्वभाव से अधिक आक्रामक और खतरनाक हो जाते हैं।
मादा तेंदुआ और उसके दोनों शावकों को सुरक्षित रेस्क्यू करने के लिए वन विभाग ने अपना दायरा बढ़ा दिया है। संभावित ठिकानों पर पहले ही 16 मजबूत पिंजरे लगाए जा चुके थे, जबकि स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए 10 अतिरिक्त पिंजरे और लगाए जा रहे हैं। तेंदुए की मूवमेंट, पगमार्क और थर्मल डेटा के आधार पर इन कुल 26 पिंजरों को बेहद रणनीतिक स्थानों पर इंस्टॉल किया जा रहा है।
इस रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए वन विभाग के करीब 70 अनुभवी कर्मियों की विशेष टीम तैनात की गई है। यह टीम दिन-रात रिहाइशी इलाकों और जंगल के सीमावर्ती क्षेत्रों में गश्त कर रही है। ट्रैकिंग एक्सपर्ट्स तेंदुओं की हर हलचल पर पैनी नजर बनाए हुए हैं, ताकि किसी भी अनहोनी या नए हमले से पहले ही वन्यजीवों को सुरक्षित घेरे में लिया जा सके।
खतरे की गंभीरता को समझते हुए थाना ठाकुरद्वारा पुलिस और वन विभाग की टीमों ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाल लिया है। इलाके में सुरक्षा व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त करने के साथ-साथ पुलिस बल गांवों में जाकर लोगों को जागरूक कर रहा है। नियंत्रण कक्ष से पूरे क्षेत्र की पल-पल की रिपोर्ट ली जा रही है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया टीम (QRT) को मुस्तैद रखा गया है।
प्रशासन और पुलिस विभाग की ओर से स्थानीय निवासियों के लिए विशेष सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे जंगल या खेतों की तरफ अकेले जाने से बचें और बच्चों को अकेले बाहर न निकलने दें। इसके अलावा, रात के समय समूह में चलने, टॉर्च का इस्तेमाल करने और खेतों में काम करते समय शोर मचाते रहने की सलाह दी गई है।
दो तेंदुओं को पकड़ने के बाद अब प्रशासनिक टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस मादा तेंदुआ और उसके शावकों को बिना कोई नुकसान पहुंचाए पकड़ने की है। 26 पिंजरों के बड़े नेटवर्क, 70 मुस्तैद वनकर्मियों और पुलिस गश्त के जरिए ऑपरेशन का दायरा बहुत व्यापक कर दिया गया है। विशेषज्ञ टीम बेहद सावधानी के साथ ट्रैंकुलाइजर और ट्रैपिंग तकनीकों का इस्तेमाल कर रेस्क्यू पूरा करने में जुटी है।
क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बहाल होने तक यह संयुक्त रेस्क्यू अभियान लगातार जारी रहेगा। पुलिस और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी स्थिति पर सीधी नजर रखे हुए हैं। जब तक मादा तेंदुआ और उसके दोनों शावक सुरक्षित तरीके से पकड़ में नहीं आ जाते, तब तक इलाके में सर्च ऑपरेशन और हाई-टेक निगरानी का काम बिना रुके चलता रहेगा।
Updated on:
13 Aug 2026 12:08 pm
Published on:
13 Aug 2026 12:08 pm
