मुरादाबाद

भूख से हुई महिला की मौत के बाद जागी योगी सरकार, राशन लेकर घर पहुंचा प्रशासन

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर शहर के मझोला थाना क्षेत्र की जयंतीपुर कालोनी में गरीबी और भुखमरी से हो गई थी अमीर जहां की मौत
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Updated: 27 Jan 2018, 12:11 PM IST
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मुरादाबाद. गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर शहर के मझोला थाना क्षेत्र की जयंतीपुर कालोनी में गरीबी और भुखमरी के कारण अमीर जहां नामक महिला की मौत हो गई थी। उसकी तीन बेटियों ने बताया कि घर में खाने को कुछ नहीं था और मां ने भी दो-तीन दिन से कुछ नहीं खाया था। जब अधमरी हालत में उसे जिला अस्पताल ले जाया गया तो उसने वहीं दम तोड़ दिया। जब ये खबर मीडिया में आई तो स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया। वहीं प्रशासन ने इसे भूख से मौत मानने से इनकार कर दिया और अमीर जहां की मौत बीमारी से होना बताया। इसके साथ ही अपनी फजीहत होते देख प्रशासन ने शुक्रवार शाम को परिजनों को 25 हजार नगद और राशन पहुंचाया। यही नहीं उसे मुख्यमंत्री राहत कोष से और भी मदद का भरोसा दिलाया। इसके साथ ही अब सवाल ये भी उठ रहा है की अमीर जहां की मौत से पहले अगर उसे मदद मिल जाती तो तीन बच्चियों के सिर से मां का साया नहीं उठता।

शहर के थाना मझोला के जयंतीपुर में तंगहाली से जूझ रही एक महिला अमीर जहां की बीमारी से मौत हो गई। वहीं महिला का पति पुणे में मजदूरी करता है। ढाई महीने से वह घर नहीं आया था। इस वजह से घर में भूखे मरने की नौबत आ गई थी। महिला की तीन छोटी बच्चियों ने बताया कि वह तीन दिन से भूखी थीं। पड़ोसियों ने उन्हें खाना खिलाया। बच्चियों की मानें तो काफी दिनों से उनकी मां को सांस की भी परेशानी हो रही थी। गुरुवार पूर्वाह्न पड़ोसियों की मदद से बेटियां उसे जिला अस्पताल ले गईं, लेकिन डेढ़ घंटे के भीतर ही उसने दम तोड़ दिया।

मूलरूप से छजलैट के गांव फूलपुर के रहने वाले मोहम्मद यूनुस का परिवार जयंतीपुर में पुलिस चौकी के पास सलीम कुरैशी के मकान में किराए पर रहता है। यूनुस रिक्शा चलाता था, लेकिन टीबी की बीमारी होने के बाद वह एक ठेकेदार के साथ पुणे चला गया। जहां वह चाय-बिस्किट का ठेला लगाता है। उसकी पत्नी अमीर जहां (34) यहां अपनी तीन बेटियों तबस्सुम (14), रहनुमा (12) और मुस्कान (10) के साथ रहती थी। तबस्सुम ने बताया कि इस बार उसके पिता ढाई महीने से घर नहीं आए हैं। इसलिए पैसे खत्म हो गए और घर में राशन तक नहीं बचा था। तीनों बहनों ने बताया कि उन्होंने तीन दिन से कुछ नहीं खाया था। कल रात बच्चियों के सिसकने की आवाज सुनकर सामने रहने वाली शबाना उन्हें छह रोटियां दे गई। शबाना का कहना है कि बच्चियों ने तो रोटी खा ली, लेकिन काफी कहने के बाद भी अमीरजहां ने कुछ नहीं खाया। गुरुवार सुबह अचानक उसकी तबियत ज्यादा बिगड़ गई।

पड़ोसी फिरोज और रुकसाना ने बताया कि ये लोग काफी दिनों से इस तरह का जीवन जीने को मजबूर थे। कई बार स्थानीय अधिकारियों और पार्षद के पास भी गए कि इनका बीपीएल कार्ड बन जाए, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। वहीं अब तक उधार देने वाले दुकानदार रिजवान ने भी हाथ खड़े कर दिए। बोला कब तक देता, मिलने की जब उम्मीद ही खत्म हो गई थी। हालात इस कदर खराब हो गए थे कि मकान का किराया भी तीन महीने से नहीं दिया था।

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