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देश मना रहा था गणतंत्र दिवस उधर भूख से जंग लड़ते-लड़ते हार गयी अमीर जहां

मुरादाबाद में भूख से महिला की मौत, लोगों ने चंदा इकट्ठा कर किया अंतिम संस्कार
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मुरादाबाद

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Iftekhar Ahmed

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Updated: 26 Jan 2018, 2:13 PM IST

moradabad

मुरादाबाद। एक ओर जहां पूरा देश गणतंत्र दिवस के जश्न में डूबा था तो वहीं दूसरी ओर भूख और गरीबी से मुरादाबाद में एक महिला के मौत हो गई। घटना के बाद ने मौजूदा सिस्टम पर सवाल खड़ा कर दिया है। पड़ोसियों के रहमो करम पर तीन बेटियों के साथ रह रही अमीर जहां ने गुरुवार शाम दम तोड़ दिया। घटना के बाद से स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया है। कोई भी इस घटना को भूख से मौत नहीं मानने को तैयार है। वहीं इस मामले में राज्यमंत्री भूपेन्द्र चौधरी ने कहा की घटना बेहद दुखद है वहीं अगर महिला की भूख से मौत हुई है तो इसी जांच कराई जायेगी। साथ ही जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी।


बीमारी और गरीबी ने मार डाला
जानकारी के मुताबिक शहर के थाना मझोला के जयंतीपुर में तंगहाली से जूझ रही एक महिला अमीर जहां लंबे समय से बीमारी चल रही थी। घर का आर्थिक स्थिति भी कमजोर थी । वहीं महिला का पति पुणे में मजदूरी करता है। ढाई महीने से वह घर नहीं आया था। जिसकी वजह से घर में फाके की नौबत थी। महिला की तीन छोटी बच्चियों ने बताया कि वह तीन दिन से भूखी थीं। पड़ोसियों ने उन्हें खाना खिलाया। बच्चियों की मानें तो काफी दिनों से उनकी मां की सांस उखड़ती थी। गुरुवार शाम पड़ोसियों की मदद से बेटियां उसे जिला अस्पताल ले गईं। लेकिन डेढ़ घंटा के भीतर ही उसने दम तोड़ दिया।


पड़ोसियों ने की थी मदद
मूल रूप से छजलैट के गांव फूलपुर के रहने वाले मो. यूनुस का परिवार जयंतीपुर में पुलिस चौकी के पास सलीम कुरैशी के मकान में किराए पर रहता है। यूनुस रिक्शा चलाता था। लेकिन टीबी की बीमारी होने के बाद वह एक ठेकेदार के साथ पुणे चला गया। जहां वह चाय - बिस्कुट का ठेला लगाता है। उसकी पत्नी अमीर जहां अपनी तीन बेटियों के साथ रहती थी। बड़ी बेटी तबस्सुम ने बताया कि इस बार उसके पिता ढाई महीने से घर नहीं आए। इसलिए पैसे खत्म हो गए और घर में राशन तक नहीं बचा था। तीनों बहनों ने बताया कि तीन दिन से कुछ नहीं खाया था। वहीं गुरुवार रात बच्चियों के सिसकने की आवाज सुनकर सामने रहने वाली शबाना उन्हें रोटियां दी। शबाना का कहना है कि बच्चियों ने तो रोटी खा ली लेकिन काफी कहने के बाद भी अमीर जहां ने कुछ नहीं खाया। जिसके बाद उनकी मौत हो गई।


महिला के अंतिम संस्कार के लिए इकट्ठा किया चंदा
उधर, पड़ोसी फिरोज और रुकसाना ने बताया की ये लोग काफी दिनों से इस तरह का जीवन जीने को मजबूर थे। कई बार स्थानीय अधिकारियों और पार्षद के पास भी गए। लेकिन इनकी कोई मदद नहीं की गई। वहीं अब तक उधार देने वाले दुकानदार रिजवान ने भी हाथ खड़े कर दिए। हालात इस कदर खराब हो गए थे कि मकान का किराया भी तीन महीने से नहीं दिया गया। फ़िलहाल अब इस पूरे मामले की अधिकारियों द्वारा जांच की बात की जा रही है। लेकिन अभी भी उसकी बेटियों के लिए कोई मदद नहीं पहुंची है। मृतका के अंतिम संस्कार के लिए भी पड़ोसियों द्वारा चंदा किया गया।