मुरैना

अधिकारियों व ठेकेदार की सांठगांठ: मिड-डे मील बना औपचारिक, मनमाने तौर पर हो रहा भुगतान

- पानी पतली सब्जी, और सूखी रोटी खाने को मजबूर बच्चे, जब से सेंट्रल किचिन की व्यवस्था शुरू हुई, तभी से भोजन की क्वालिटी हुई हल्की

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Nov 30, 2024

मुरैना. जिले में मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था औपचारिक बनकर रह गई है। न तो मीनू के मुताबिक भोजन दिया जा रहा है और न ही भोजन में क्वालिटी बेहतर है। स्कूलों में बच्चों की संख्या के मान से भी भुगतान नहीं हो रहा है। ठेकेदार व अधिकारियों की मिली भगत से मनमाने तौर पर भुगतान किया जा रहा है।

  • क्या हैं शासन के इंतजामशासन स्तर से शहर में सेंट्रल किचिन सिस्टम और ग्रामीण क्षेत्रों में समूहों के माध्यम से बच्चों को भोजन दिया जा रहा है। इसके लिए शासन ने हर स्कूल पर 60 प्रतिशत बच्चों के मान से भुगतान करना तय किया है लेकिन देखने में मिला है कि कुछ स्कूलों में 40 प्रतिशत हाजिरी दी जा रही है, उसके बाद भी 60 प्रतिशत का भुगतान लंबे समय से किया जा रहा है। यह सब ठेकेदार व अधिकारियों की सांठगांठ से हो रहा है। नियमानुसार भोजन की क्वालिटी चेक करने के लिए अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई लेकिन ठेकेदार से मिली भगत के चलते कार्यालय में बैठकर ही रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी जाती है।
  • जिले में मिड डे मिल पर हो रही राशि व्ययमध्यान्ह भोजन के लिए महीने पर लाखों रुपए की राशि का भुगतान किया जा रहा है। शहरी क्षेत्र के करीब 80-90 स्कूलों में सेंट्रल किचिन स्थापित की गई जिसके द्वारा स्कूलों में भोजन सप्लाई किया जा रहा है। इसके लिए बीआरसी के माध्यम से हाजिरी ऑनलाइन की जाती है, उसके बाद शासन स्तर से सीधा पैसा खाते में भेजा जाता है। लेकिन इसकी मॉनीटरिंग जिला पंचायत में बैठे अधिकारियों को करनी हैं लेकिन वह कार्यालय से नहीं निकलते। जो ठेकेदार कहता है, वही होता है।
  • पुराना मीनू गायब, नए का पता नहींशासन स्तर से पुराना मीनू बदल दिया है। इसके चलते स्कूलों की दीवारों पर चस्पा किए गए मीनू चार्ट को गायब कर दिया है लेकिन जिम्मेदारों ने नए मीनू चार्ट को स्कूलों की दीवार पर चस्पा नहीं किया है। इसके चलते संस्था प्रभारी और न स्टाफ का पता है कि नए मीनू में क्या है। इसका पूरा फायदा ठेकेदार उठा रहा है। स्थिति यह है ठेकेदार जो भेज दे, उसको रसोइया बच्चों को परोस देते हैं। इसके चलते संस्था प्रभारी भी कुछ नहीं कह पाते हैं क्योंकि उनको भी नहीं पाता नए मीनू में क्या साप्ताहिक एमडीएम क्या देना हैं। वहीं जिला पंचायत के एमडीएम विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने भी नए मीनू को ऑफिशियल ग्रुपों पर शेयर किया है। कुछ शिक्षकों का तो यह भी कहना हैं कि नया मीनू आया भी है कि नहीं या फिर ठेकेदार द्वारा अफवाह फैलाई गई, यह भी नहीं पता।
  • स्कूलों के ये हैं हालातशहर के शासकीय प्राइमरी स्कूल गढ़ौरा पुरा में 282 शासकीय मिडिल स्कूल जौरी में 916 एवं शासकीय मिडिल स्कूल नेहरू पार्क रोड में 180 के करीब बच्चे दर्ज हैं, लेकिन यहां बमुश्किल 40 से 50 प्रतिशत बच्चे ही स्कूल आ रहे हैं। संस्था प्रभारी भी वास्तविक रिपोर्ट भेज रहे हैं, लेकिन जन शिक्षक अपने स्तर पर बीआरसी कार्यालय में रिपोर्ट दे रहे हैं। शासन से ज्यादातर स्कूलों में 60 प्रतिशत भुगतान होने की खबर है। शासन ने पूरे सात दिन के लिए मीनू तय किए हैं लेकिन ठेकेदार ने यह कहकर मीनू चार्ट स्कूलों से साफ कर दिया कि नया चार्ट आ गया है लेकिन नया चार्ट आज तक नहीं लगाया गया है। मंगलवार को छोडकऱ पूरे सात दिन पानी पतली सब्जी, सूखी रोटी स्कूलों में पहुंच रही हैं, जिससे अधिकांश बच्चे खाते भी नहीं हैं।
  • रोजाना पानी पतली सब्जी मिल रही है, रोटी सूखी आती हैं। रोटी इतनी कडक़ आती हैं कि उसको तोडऩे में बड़ी मशक्कत करनी पड़ती है।अनुरुद्दीन, छात्र
  • खाने में पतले आलू की सब्जी आती है, एक दिन पूड़ी मिलती हैं। खाना अच्छा नहीं लगता, इसलिए कम ही खाते हैं। हमने सर से शिकायत की है।नर्मदा, छात्रा
  • खाने में सब्जी पानी पतली और रोटी ऐसी आती हैं, जिनको दांत से चबाने में पेरशानी होती है। इसलिए सब्जी में मिलाकर खाना पड़ता है।परी, छात्रा
  • सात दिन में सिर्फ एक दिन मंगलवार को पूड़ी मिलती हैं। बांकी तीन दिन खिचड़ी ही आती है। किसी चावल आ जाते हैं, किसी नहीं आते।पूजा, छात्राक्या कहते हैं जिले के जिम्मेदार अधिकारी
  • बीआरसी बच्चों की संख्या की ऑनलाइन फीडिंग करते हैं, उसी के आधार पर भुगतान किया जाता है।श्रुति शर्मा, सहायक प्रभारी, एमडीएम, जिला पंचायत
  • स्कूलों से एमडीएम की संख्या जन शिक्षक द्वारा दी जाती है, उसके हिसाब से हम हाजिरी ऑनलाइन करते हैं। उसी के हिसाब से भुगतान किया जाता है।देवेन्द्र तोमर, बीआरसी
Updated on:
30 Nov 2024 03:53 pm
Published on:
30 Nov 2024 03:52 pm
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