दुल्हन बनने से पहले पिता का साया छिन गया, कार ने बाइक को मारी टक्कर, दो की मौत
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- पानी पतली सब्जी, और सूखी रोटी खाने को मजबूर बच्चे, जब से सेंट्रल किचिन की व्यवस्था शुरू हुई, तभी से भोजन की क्वालिटी हुई हल्की
मुरैना. जिले में मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था औपचारिक बनकर रह गई है। न तो मीनू के मुताबिक भोजन दिया जा रहा है और न ही भोजन में क्वालिटी बेहतर है। स्कूलों में बच्चों की संख्या के मान से भी भुगतान नहीं हो रहा है। ठेकेदार व अधिकारियों की मिली भगत से मनमाने तौर पर भुगतान किया जा रहा है।