शहर में लगे हैं गंदगी के ढेर, सडक़ों से टस्टबिन गायब, कैसे बढ़ेगी रैकिंग, यही हाल रहा तो पिछले से भी नीचे गिर सकती है रैकिंग, निगम प्रशासन ने नहीं की कोई प्लानिंग
मुरैना. शहर की स्वच्छता रैकिंग बढ़े, इसके लिए नगर निगम की तमाम कवायद के बावजूद शहर में जगह जगह गंदगी के ढेर लगे हैं। रैकिंग बढ़े इसके लिए जो प्रयास किए जा रहे हैं, वह काफी नहीं हैं। पिछली साल तमाम कवायद के बाद भी रैकिंग 26 पायदान नीचे लुढक़ गई थी, निगम के पास तमाम अमला हैं, वाहन व कर्मचारियों पर महीने में लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, उसके बाद भी शहर की स्वच्छता की रैकिंग बढ़ पाएगी, यह कह पाना अभी संभव नहीं हैं। क्योंकि स्वच्छता को लेकर जिस तरह के प्रयास होना चाहिए, वह नहीं हो पा रहे हैं।
नगर निगम की रैंकिंग वर्ष 2022 में 73 पर थी। इसको बनाए रखने और इसके ऊपर बढऩे के लिए नगर निगम के अमले ने काफी कवायद तो की लेकिन धरातल पर नहीं, सिर्फ कागजों में हुई। स्वच्छता के लिए सामान खरीदी के नाम पर लाखों रुपए पानी की तरह बहा दिए लेकिन शहर में गंदगी उन्मूलन पर ठोस प्लान नहीं किया और जागरुकता को लेकर भी निगम का अमला सिर्फ सर्वे टीम आने से पहले ही सक्रिय दिखाई दिया, उससे पहले निगम का स्वच्छता अमला पूरे साल भर निष्क्रीय दिखाई दिया, उसी का परिणाम है पिछले तीन साल से स्वच्छता की रैकिंग लगातार गिरती जा रही है। वर्ष 2023 में स्वच्छता की रैकिंग 33 पायदान नीचे लुढकक़र 116 पर पहुंच गई। वर्ष 2024 में 26 पायदान नीचे गिरकर रैकिंग 142 पर पहुंच गई। अब वर्ष 2025 की रैकिंग होनी हैं, इसके लिए गोपनीय रूप से टीम आएगी और शहर का भ्रमण करके जो स्वच्छता के फैक्ट हैं, उनका आंकलन करके ले जाएगी लेकिन इस बार भी निगम का स्वच्छता अमला रैकिंग बढ़े, इसके प्रयास तो कर रहा है लेकिन पर्याप्त नहीं हैं। सर्वेक्षण टीम कभी भी शहर में आ सकती है और शहर की मुख्य सडक़ों को छोडकऱ बस्तियों में आज भी कचरे के ढेर लगे हैं।
शहर से रोज औसतन 90 टन कचरा निकलता है। इसको टोर टू टोर वाहन, ट्रैक्टर-ट्रॉली व डंपर से निंबी स्थित डपिंग स्थल पर पहुंचाया जाता है। इसके अलावा शहर की ऐसी कई बस्तियां हैं जहां से कचरा नहीं उठ रहा है, ऐसी बस्तियों में भी करीब 20 टन कचरा रोजाना एकत्रित हो रहा है, जिसका उठाव नहीं हो रहा है।
निगम की स्वच्छता का पूरा दारोमदार स्वच्छता प्रभारी पर रहता है। लेकिन जो भी स्वच्छता प्रभारी रहा, उसका फोकस सिर्फ दीवार लेखन व डस्टबिन सहित खरीदारी पर रहता है। स्वच्छता के नाम पर जिम्मेदारों ने कूड़ेदान कचरा गाडिय़ां समेत अन्य सामग्री खरीद पर लाखों रुपए खर्च कर दिए। पिछली साल भी सर्वेक्षण टीम आने से पूर्व शहर की एम एस रोड पर करीब 20 लाख कूड़ेदान लगाए, वह सभी टूट गए और फिर से 2025 की शुरूआत में जगह- जगह कूड़ेदान लगा गए, वह भी शहर की मुख्य सडक़ों से गायब है इसलिए सडक़ों पर ही कचरा एकत्रित हो रहा है।
निगम की स्वच्छता रैकिंग बढ़ाने की दिशा में कई प्रयास हैं जो हो सकते हैं। इसमें शहर में जगह जगह पसरी गंदगी के ढेर समाप्त किए जाएं। डोर टू डोर वाहनों का प्रोपर बस्तियों तक पहुंचाया जाए। शिकायत का समय पर निराकरण हो, जब भी किसी द्वारा सीएम हेल्पलाइन पर गंदगी या नाले, नालियों संबंधी शिकायत की गई, उस पर निगम का मैदानी अमला मौके पर पहुंचकर समस्या का निराकरण करे, अक्सर कार्यालय में बैठकर ही समस्या का निराकरण दिया जाता है। शहर में जगह- जगह पाइप लाइन के चलते सडक़ खोद दी हैं, वहां पर भी गंदगी पसर रही है।
शहर की रैकिंग बढ़े इसके लिए नगर निगम के साथ आम लोगों को भी जागरुक होने का परिचय देना होगा। कचरा कहां डालना हैं और कब डालना है, यह स्वयं तय करना होगा। वहीं निगम को भी गंदगी फैलाने वालों पर जुर्माना करना होगा, तभी कुछ प्रयास सार्थक हो सकते हैं।
शहर में धरातल पर काम नहीं होता। प्लानिंग तो की जाती हैं लेकिन उसके हिसाब से काम नहीं होता। अगर 50 प्रतिशत काम भी प्लानिंग के हिसाब से हो जाए तो काफी हद तक सुधार हो सकता है। वहीं आम लोगों को स्वयं जागरुक होकर तय स्थान पर ही कचरा डालें।
निगम में अधिकारी, कर्मचारी व जनप्रतिनिधि स्वच्छता रैकिंग को लेकर वर्ष भर निष्क्रीय रहते हैं। जब सर्वे टीम आने को होती है तब कुछ दिन के लिए सक्रिय होते हैं और फिर हाथ पर हाथ रखकर बैठ जाते हैं। निगम प्लानिंग से कोई काम नहीं करती।
निगम में कार्य के प्रति जिम्मेदार उदासीन हैं। शहर में कहीं गंदगी है, शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं होती। सफाई को लेकर प्रोपर मॉनीटरिंग नहीं होती। अधिकारी प्लानिंग के हिसाब से काम करें तो निश्चित ही रैकिंग में सुधार हो सकता है।
130 वाहन लगे हैं निगम के सफाई कार्य में गाड़ी अड्डा पर।
10 जेसीबी वाहन।
30 ट्रैक्टर-ट्रॉली कचरा ढोने में।
75 डोर टू डोर वाहन जुड़े हैं गाड़ी अड्डा से।
100 कर्मचारी तैनात हैं गाड़ी अड्डा पर।
30 से 35 लाख का डीजल लगता है वाहनों में हर महीने।
03 लाख के करीब मेंटेंनेंस पर होते हैं महीने में खर्च।
12 लाख के करीब वेतन खर्च होता है गाडी अड्डा पर तैनात कर्मचारियों पर।
600 से अधिक सफाईकर्मी तैनात हैं निगम में।
निंबी गांव में कचरा प्लांट पिछली बार बंद था, इस बार शुरू हो गया है, अब कचरे का निबटान किया जा रहा है। स्वच्छता रैकिंग को लेकर पिछली बार जिन विंदुओं पर हम कमजोर रहे, उन पर वर्ष भर काम किया है, अभी भी काम चल रहा है। उम्मीद है इस बार रैकिंग बढकऱ मिलेगी।