मुरैना

जयेश्वर महादेव मंदिर मेले में परोसी अश्लीलता

मुरैना. नगर पालिका अंबाह द्वारा आयोजित ऐतिहासिक जयेश्वर महादेव मेले में बीती रात रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने हजारों दर्शकों को आकर्षित किया। मंच पर रशियन डांसर्स की प्रस्तुति और मुंबई से आए डांस ग्रुप रियल रॉकर्स के धमाकेदार प्रदर्शन ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। हालांकि विदेशी कलाकारों की प्रस्तुति को लेकर क्षेत्र […]

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Mar 04, 2026

मुरैना. नगर पालिका अंबाह द्वारा आयोजित ऐतिहासिक जयेश्वर महादेव मेले में बीती रात रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने हजारों दर्शकों को आकर्षित किया। मंच पर रशियन डांसर्स की प्रस्तुति और मुंबई से आए डांस ग्रुप रियल रॉकर्स के धमाकेदार प्रदर्शन ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। हालांकि विदेशी कलाकारों की प्रस्तुति को लेकर क्षेत्र में आस्था और आधुनिकता के संतुलन पर बहस भी तेज हो गई है।


एक तरफ भाजपा सनातन व संस्कृति की दुहाई देती है, वहीं अंबाह में भाजपा नेता जिला उपाध्यक्ष जिनेश जैन द्वारा खुलेआम सनातन व संस्कृति की धज्ज्यिां उड़ाई जा रही हैं। उनकी पत्नी नगर पालिका अध्यक्ष हैं लेकिन मेले की पूरी कमान जिनेश जैन के हाथों में ही है, उनके द्वारा मंच से नंगाा नाच किया जा रहा है, महिलाओं को लेकर अभद्र व अश्लील बातें की जा रही हैं, जिससे लोगों में आक्रोश है। रात जैसे ही तीन विदेशी कलाकार मंच पर पहुंचे, दर्शकों ने तालियों की गडगड़़ाहट से उनका स्वागत किया। कलाकारों ने बैली डांस की प्रस्तुति दी, जिससे माहौल उत्साह से भर गया। इसके बाद मुंबई से आए रियल रॉकर्स ग्रुप ने प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर के लोकप्रिय गीतों ‘तेरी दीवानी’ और ‘सजना तेरा सजना दिन रैन करूं’ पर एक के बाद एक प्रस्तुतियां देकर समां बांध दिया। मेले में सोमवार रात पारंपरिक होली गायन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। मेले का यह आयोजन जहां एक ओर सांस्कृतिक उत्सव के रूप में सराहा जा रहा है, वहीं धार्मिक आस्था और आधुनिक मनोरंजन के संतुलन को लेकर नई चर्चा भी छेड़ गया है। अब नजर आयोजन समिति और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है।

आस्था या आधुनिकता उठे सवाल

जयेश्वर महादेव जैसे धार्मिक मेले में विदेशी नृत्य प्रस्तुतियों को लेकर क्षेत्र में मतभेद सामने आए हैं। एक वर्ग का कहना है कि यह मेला भगवान शिव की आराधना और परंपराओं का प्रतीक है, ऐसे में इस प्रकार के कार्यक्रम धार्मिक गरिमा के अनुरूप नहीं हैं। वहीं दूसरे वर्ग का मत है कि सांस्कृतिक विविधता और मनोरंजन से मेले की लोकप्रियता बढ़ती है और अधिक लोग इससे जुड़ते हैं। सोशल मीडिया पर ‘ये आस्था है या पाखंड’ जैसे सवालों के साथ चर्चा जारी है। कुछ सामाजिक संगठनों ने आयोजकों से भविष्य में धार्मिक संवेदनाओं का ध्यान रखने की मांग की है।

Published on:
04 Mar 2026 08:41 pm
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