
मुरैना के अलावा अंबाह, जौरा में भी प्रधानमंत्री के नाम दिए ज्ञापन, जबरन लिंकिंग, डीलर मार्जिन वृद्धि, साथी पोर्टल सहित 6 मांग शामिल
मुरैना. देश भर के कृषि आदान व्यापारियों की समस्याओं को लेकर मुरैना जिला खाद बीज दवाई विक्रेता संघ ने एसडीएम मुरैना भूपेन्द्र सिंह को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन भेजा है। यह ज्ञापन एग्रो इनपुट डीलर्स एसोसिएशन नई दिल्ली के माध्यम से भेजा गया, जिसमें कृषि से जुड़े व्यापारियों की विभिन्न चुनौतियों को रेखांकित किया गया है।
संघ ने ज्ञापन में मुख्य रूप से उर्वरक निर्माता कंपनियों द्वारा सब्सिडी वाले खाद के साथ गैर-अनुदानित उत्पादों की जबरन लिंकिंग पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की है। 27 अप्रैल देशीव्यापी हड़ताल के तहत मुरैना में भी व्यापारी हड़ताल पर रहे। इसके साथ ही, खाद की डिलीवरी सीधे डीलर के बिक्री केंद्र तक सुनिश्चित करने और डीलर मार्जिन को बढ़ाकर कम से कम 8 प्रतिशत करने की भी मांग की गई है। अन्य मांगों में ग्रामीण खुदरा विक्रेताओं के लिए साथी पोर्टल को वैकल्पिक बनाना, अवैध बीजों की बिक्री पर प्रभावी रोक और सीलबंद पैकेजिंग में नमूना फेल होने पर विक्रेता को केवल गवाह मानने का प्रावधान शामिल है। मुरैना जिला खाद बीज दवाई विक्रेता संघ के संरक्षक अशोक महेश्वरी, सुधीर महेश्वरी और रामावतार खण्डेलवाल, अध्यक्ष बनवारी लाल कुशवाह, उपाध्यक्ष अमित गर्ग और कोषाध्यक्ष विनोद अग्रवाल ज्ञापन के समय मौजूद रहे।
जौरा कस्बे में सोमवार को बीज, खाद और कीटनाशक विक्रेताओं ने अपनी मांगों को लेकर दुकानें बंद रखीं। इस बंद के चलते किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। खेती के इस महत्वपूर्ण समय में आवश्यक सामग्री न मिलने से कई किसान बाजार से खाली हाथ लौट गए। व्यापारियों के अनुसार, यह बंद वर्तमान नियम और नीतियों के विरोध में किया गया, जो छोटे व्यापारियों के लिए कठिन साबित हो रही हैं। खाद-बीज विक्रेता संगठन ने एक से अधिक जिलों में व्यापार के लिए अलग-अलग लाइसेंस की अनिवार्यता खत्म करने की मांग की है।
अंबाह. कृषि आदान विक्रेता संघ, अंबाह ने अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर शासन-प्रशासन को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि इन समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो प्रदेशभर में व्यापक आंदोलन किया जाएगा। संघ के अध्यक्ष शैलेन्द्र शर्मा छोटई और सचिव मोहित शर्मा के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि कृषि आदान विक्रेता लंबे समय से प्रशासनिक, तकनीकी और व्यावसायिक जटिलताओं से जूझ रहे हैं। इससे न केवल व्यापार प्रभावित हो रहा है, बल्कि किसानों को भी समय पर कृषि सामग्री नहीं मिल पा रही है।
Published on:
30 Apr 2026 03:46 pm
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