मुंबई

खेलने-कूदने की उम्र में छूटा मां का आंचल; सिंधुदुर्ग की 11 साल की मासूम तन्वी ने कांपते हाथों से मुखाग्नि देकर निभाया बेटे का फर्ज

Sindhudurg News: महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग में 11 वर्षीय तन्वी चव्हाण ने अपनी बीमार मां के निधन के बाद उन्हें मुखाग्नि देकर अंतिम विदाई दी। आर्थिक तंगी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच पांचवीं कक्षा की छात्रा की यह मार्मिक कहानी हर किसी की आंखें नम कर रही है।
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Jul 10, 2026
Sindhudurg News
सिंधुदुर्ग की 11 साल की मासूम तन्वी ने कांपते हाथों से मुखाग्नि देकर निभाया बेटे का फर्ज, ( AI जनरेटेड फोटो )

Maharashtra News: कहते हैं कि बेटियां वक्त से पहले समझदार हो जाती हैं, लेकिन महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले से जो दिल दहला देने वाली तस्वीर सामने आई है, उसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। अभी उम्र सिर्फ 11 साल है, हाथों में खिलौने और किताबों का बोझ होना चाहिए था, लेकिन नियति के क्रूर फैसले ने इस मासूम के हाथों में चिता को मुखाग्नि देने की लकड़ी थमा दी। सिंधुदुर्ग जिले के कणकवली तालुका के वाघाची वाडी में रहने वाली 5वीं क्लास की छात्रा तन्वी चव्हाण ने अपनी मां के निधन के बाद न सिर्फ खुद को संभाला, बल्कि उनके पार्थिव शरीर को मुखाग्नि देकर अंतिम विदाई भी दी। इस भावुक और हृदयविदारक मंजर को देखकर वहां मौजूद हर ग्रामीण और रिश्तेदार की आंखें फूट-फूट कर रो पड़ीं।

छोटी सी उम्र में संभाली गृहस्थी

तळेरे वाघाची वाडी के रहने वाले संदीप चव्हाण की पत्नी प्रियंका पिछले कई महीनों से एक बेहद गंभीर और लाइलाज बीमारी से जूझ रही थीं। घर की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी। पिता संदीप चव्हाण किसी तरह तळेरे में मजदूरी करके परिवार का गुजारा चला रहे थे। घर में बूढ़े दादा, पिता और बीमार मां के अलावा कोई नहीं था।

ऐसे में 11 साल की नन्हीं तन्वी ही इस टूटते परिवार की रीढ़ की हड्डी बनी। जिस उम्र में बच्चे बेफिक्र होकर खेलते हैं, उस उम्र में तन्वी सुबह उठकर बीमार मां की सेवा करती, पूरे परिवार के लिए खाना बनाती, घर के काम निपटाती और फिर स्कूल (वामनराव महाडिक विद्यालय) जाती। सिर्फ इतना ही नहीं, 5वीं क्लास की यह मासूम अपनी मां को इस दर्दनाक बीमारी से लड़ने के लिए मानसिक हिम्मत भी देती थी। वह पढ़ाई में भी बेहद होनहार है और उसे कला क्षेत्र का भी शौक है।

टूट गया उम्मीदों का दामन, कांपते हाथों से दिया मुखाग्नि

तन्वी की तमाम कोशिशों और दुआओं के बाद भी निष्ठुर नियती को कुछ और ही मंजूर था। प्रियंका की तबीयत लगातार बिगड़ती गई और आखिरकार उन्होंने दम तोड़ दिया। मां के जाने से तन्वी के सिर पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन इस बेहद कठिन और दर्दनाक घड़ी में भी इस बच्ची ने गजब का साहस दिखाया।

जब मां की अंतिम विदाई का समय आया, तो समाज की पुरानी रूढ़ियों को पीछे छोड़ते हुए और परिवार की परिस्थितियों को देखते हुए तन्वी ने खुद मां का अंतिम संस्कार करने का फैसला किया। श्मशान घाट पर जब इस 11 साल की मासूम ने अपनी मां की चिता को मुखाग्नि दी, तो उसके हाथ बुरी तरह कांप रहे थे और आंखों से आंसुओं का सैलाब बह रहा था। इस बेहद मार्मिक दृश्य को देखकर श्मशान घाट पर मौजूद हर शख्स का कलेजा कांप उठा।

पूरे जिले में तन्वी के साहस की चर्चा, भावुक हुए लोग

विपत्ति के इस पहाड़ को जिस बहादुरी और समझदारी से इस नन्हीं बच्ची ने झेला है, उसकी चर्चा अब सिर्फ तळेरे गांव में ही नहीं, बल्कि पूरे सिंधुदुर्ग जिले में हो रही है। लोग तन्वी के इस बेमिसाल साहस और मां के प्रति उसके समर्पण को सलाम कर रहे हैं, साथ ही इस बात से भी बेहद दुखी हैं कि इतनी छोटी सी उम्र में उस मासूम से उसकी मां का साया हमेशा के लिए छिन गया।

Updated on:
10 Jul 2026 02:37 pm
Published on:
10 Jul 2026 02:37 pm