
शिवसेना पार्षद को तीन दिन की पुलिस कस्टडी
Ramesh Mhatre: महाराष्ट्र के डोंबिवली में केडीएमसी अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सों से मारपीट मामले में कल्याण कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मुख्य आरोपी और शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे समेत चार आरोपियों को सोमवार तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया। स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत के चलते ठाणे सिविल अस्पताल में भर्ती रमेश म्हात्रे को शुक्रवार सुबह छुट्टी मिली। इसके बाद पुलिस ने उन्हें कोर्ट में पेश किया। पुलिस ने जांच के लिए आरोपियों की कस्टडी मांगी थी। यह मामला एक गर्भवती महिला के इलाज में कथित देरी के बाद डॉक्टरों और नर्सों से मारपीट का है।
पुलिस के मुताबिक, सोमवार शाम को शास्त्री नगर अस्पताल में यह घटना हुई। एक गर्भवती महिला का इलाज चल रहा था। डॉक्टरों ने बताया कि अस्पताल में NICU बेड भरे हुए थे, इसलिए उन्हें दूसरी जगह शिफ्ट करने की सलाह दी। इसी बात पर परिवार वाले नाराज हो गए और पार्षद रमेश म्हात्रे अपने साथियों के साथ अस्पताल पहुंच गए। वहां उन्होंने डॉक्टरों और स्टाफ के साथ बदसलूकी की और मारपीट कर दी।
इस मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। बुधवार को रमेश म्हात्रे ने खुद थाने में सरेंडर कर दिया। उसी दिन उनके तीन साथियों को भी पकड़ लिया गया। कोर्ट में पेशी के बाद कोर्ट ने म्हात्रे समेत चारों को तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेजा है।
शिवसेना ने इस घटना से खुद को दूर किया है। पार्टी के सांसद श्रीकांत शिंदे ने साफ कहा कि जो भी गलत करेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। म्हात्रे को शो-कॉज नोटिस भी जारी कर दिया गया है। अगर दोषी पाए गए तो पार्टी अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगी।
रमेश म्हात्रे ने गिरफ्तारी के बाद पहली बार बयान दिया। उन्होंने मारपीट की घटना पर अफसोस जताया, लेकिन महिला डॉक्टर पर हाथ उठाने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि मैंने सिर्फ उनका ध्यान खींचने के लिए हाथ थपथपाया था। वो फोन पर बात कर रही थीं और हमारी बात नहीं सुन रही थीं। हम बालासाहेब की सीख पर चलते हैं, कभी महिलाओं पर हाथ नहीं उठाया और ना ही उठाएंगे। उन्होंने अस्पताल की कमियों को भी इस घटना की वजह बताया।
इस घटना के बाद अस्पताल के डॉक्टरों में काफी गुस्सा है। एक महिला डॉक्टर ने इस्तीफा दे दिया और ठाणे छोड़कर चली गईं। उन्होंने कहा कि डर के माहौल में काम करना मुश्किल है।
पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है। CCTV फुटेज भी सामने आ चुका है, जिसमें मारपीट साफ दिख रही है। विपक्षी पार्टियों ने इस घटना पर शिवसेना पर तीखा हमला बोला है।
सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के साथ ऐसी घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। इस मामले में भी सख्त कार्रवाई की मांग हो रही है ताकि भविष्य में कोई भी ऐसा हौसला न कर सके।
Updated on:
10 Jul 2026 04:27 pm
Published on:
10 Jul 2026 04:06 pm
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