मुंबई

‘गुजरात में हिंदी नहीं बोली जाती फिर भी…’, अमित शाह ने मराठी को लेकर कही बड़ी बात, शिवाजी महाराज का भी किया जिक्र

Amit Shah on Hindi Diwas: हिंदी दिवस पर नवी मुंबई में छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय भाषाओं के विकास, मातृभाषा की शिक्षा और दूसरी भारतीय भाषा सीखने पर जोर दिया।
3 min read
Sep 14, 2026
Amit Shah Hindi Diwas
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Photo: IANS/File)

All India Rajbhasha Sammelan: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को नवी मुंबई स्थित सिडको प्रदर्शनी केंद्र में हिंदी दिवस समारोह और छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने हिंदी के साथ देश की सभी भारतीय भाषाओं के संरक्षण और विकास पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की भाषाई विविधता उसकी ताकत है और हर भारतीय भाषा को समृद्ध करना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदी देश की भाषाई एकता और राष्ट्रीय चेतना की वाहक है।

गणेशोत्सव के पहले दिन आयोजित कार्यक्रम में अमित शाह ने हिंदी दिवस और गणेश चतुर्थी के संयोग को भी विशेष बताया। उन्होंने कहा कि आज एक तरफ हिंदी दिवस है और दूसरी तरफ गणपति बप्पा का आगमन हुआ है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना जाता है और उन्हें विश्वास है कि गणपति भारतीय भाषाओं के विकास के रास्ते में आने वाली बाधाओं को भी दूर करेंगे।

महाराष्ट्र की बहुभाषी संस्कृति की तारीफ

अमित शाह ने महाराष्ट्र की बहुभाषी संस्कृति की प्रशंसा करते हुए कहा कि मराठी भाषा का सम्मान होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिला है।

उन्होंने कहा, "मैं महाराष्ट्र की बहुभाषी संस्कृति को सिर झुकाकर प्रणाम करता हूं। यहां मराठी भाषा का सर्वोच्च सम्मान है और होना भी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही मराठी भाषा को 'शास्त्रीय भाषा' (Classical Language) का दर्जा प्रदान किया है। हालांकि, छत्रपति शिवाजी महाराज की यह भूमि हमेशा से उदार रही है। यहां मराठी के साथ-साथ कोंकणी, गुजराती, सिंधी, हिंदी और कन्नड़ जैसी कई भाषाओं ने अपना विस्तार किया है और सभी को सम्मान मिला है। महाराष्ट्र सही मायनों में देश का सबसे बड़ा बहुभाषी राज्य है।"

‘गुजरात में गुजराती बोलते हैं, लेकिन हिंदी की वजह से देशभर में...’

अपने भाषाई अनुभव का उल्लेख करते हुए अमित शाह ने कहा कि वह गुजरात से आते हैं, जहां मुख्य रूप से गुजराती बोली जाती है। लेकिन जब उनकी पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी दी, तब हिंदी की समझ और बोलने की क्षमता ने उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में काम करने में काफी मदद की। उन्होंने कहा कि भाषा लोगों को जोड़ने का माध्यम है और भारतीय भाषाओं को एक-दूसरे के करीब लाने से देश की एकता और मजबूत होगी।

वीर सावरकर के भाषाई योगदान का किया उल्लेख

अमित शाह ने वीर सावरकर के भाषाई योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सावरकर अपने समय के विद्वान भाषाविदों में शामिल थे और उन्होंने भारतीय भाषाओं में उपलब्ध नहीं रहने वाले कई शब्दों को गढ़ा और प्रचलित किया।

उन्होंने कहा कि ऐसे शब्दों को हिंदी समेत भारतीय भाषाओं में स्थान देकर भाषा को समृद्ध किया गया है। अमित शाह ने यह भी कहा कि भारतीय भाषाओं के शब्दों को अपनाने से हिंदी की शब्द-संपदा और मजबूत हुई है।

नई शिक्षा नीति को बताया बड़ी उपलब्धि

केंद्रीय गृह मंत्री ने नई शिक्षा नीति (NEP) का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राथमिक शिक्षा में मातृभाषा के महत्व पर विशेष जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि बच्चे के समग्र विकास के लिए अपनी मातृभाषा सीखना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि मातृभाषा के साथ एक और भारतीय भाषा सीखने से बच्चे का जुड़ाव देश के दूसरे हिस्सों और वहां की संस्कृति से भी बढ़ता है। उनके मुताबिक, यह ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

‘दूसरी भारतीय भाषा सीखना देश से जोड़ता है’

अमित शाह ने कहा कि दूसरी भारतीय भाषा सीखने का विरोध करने वाले लोग शायद इसके व्यापक महत्व को नहीं समझते। जब कोई बच्चा अपनी मातृभाषा के साथ किसी अन्य भारतीय भाषा को सीखता है तो वह देश की विविधता को बेहतर ढंग से समझ पाता है।

उन्होंने कहा कि भाषा के माध्यम से अलग-अलग राज्यों और समुदायों के बीच दूरी कम होती है और देश के प्रति जुड़ाव बढ़ता है। उन्होंने भारतीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और उनके बीच आपसी संवाद को आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।

Updated on:
14 Sept 2026 05:07 pm
Published on:
14 Sept 2026 04:56 pm