Maharashtra Political News: शिवसेना और धनुष-बाण हासिल करने का विवाद सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग के सामने चल रहा है। इस बीच जहां शिंदे समूह की ताकत दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है तो वहीं दूसरी ओर ठाकरे खेमे की चुनौतियों बढ़ रही है।
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाला खेमा लगातार मजबूत हो रहा है, उधर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को पार्टी को एकसाथ करने में अब तक कोई बड़ी सफलता नहीं मिली है। पार्टी में विद्रोह के बाद ठाणे से शिवसेना पार्षद साथ छोड़ चले गए। उसके बाद नवी मुंबई के नगरसेवकों ने भी शिंदे समूह का समर्थन किया। जबकि नागपुर और सोलापुर के कुछ पदाधिकारियों ने भी एकनाथ शिंदे के साथ जाने की घोषणा की. अब ऐसी ही तस्वीर आज फिर कर्जत और अंबरनाथ में दिखाई दी।
शिवसेना में नए बगावत से एकनाथ शिंदे का समर्थन और भी बढ़ गया है। जानकारी के मुताबिक, कुछ पदाधिकारियों ने इस्तीफा भी दिया है। और उन्होंने शिंदे के कदम का स्वागत किया है। एक ओर आज मातोश्री में हुए शिवसेना सांसदों की बैठक में कई सांसद गायब थे, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर उद्धव ठाकरे की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। इस भगदड़ को रोकने के लिए उद्धव ठाकरे के बेटे व शिवसेना विधायक आदित्य ठाकरे ‘निष्ठा यात्रा’ के जरिए मैदान में उतरे हैं। यह भी पढ़े-मातोश्री से आई बड़ी खबर: उद्धव ठाकरे की बैठक में पहुंचे 23 में से सिर्फ 12 सांसद, शिवसेना की टेंशन बढ़ी?
आज उद्धव ठाकरे को पहला झटका कर्जत खालापुर विधानसभा क्षेत्र से लगा, जहां कर्जत खालापुर के मौजूदा विधायक महेंद्र थोरवे के समर्थन में शिवसेना के पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा जिलाध्यक्ष मनोहरशेठ भोईर को सौंप दिया है।
वहीं शिंदे गुट का विधायक बालाजी किणीकर के संसदीय क्षेत्र में भी समर्थन बढ़ रहा है। अंबरनाथ महानगरपालिका में कुल पार्षदों की संख्या 59 है। हालांकि, इसमें शिवसेना के 26 पार्षद हैं। इनमें से अंबरनाथ नगर परिषद निर्वाचन क्षेत्र के 21 नगरसेवक, नगरसेवक और दो स्वीकृत नगरसेवकों ने एकनाथ शिंदे को अपना खुला समर्थन दिया है।
सभी ने कल्याण लोकसभा सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे से मुलाकात कर एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाले समूह को अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की। ज्ञात हो कि शिवसेना नेता श्रीकांत मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पुत्र है। इसके अलावा शिंदे गुट के समर्थन के लिए सैकड़ों शिवसैनिक और पदाधिकारी भी आगे आए हैं। जिस वजह से इस क्षेत्र में भी उद्धव ठाकरे समूह की दुविधा बढ़ती दिख रही है।
शिवसेना और धनुष-बाण हासिल करने का विवाद सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग के सामने चल रहा है। इस बीच जहां शिंदे समूह की ताकत दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है तो वहीं दूसरी ओर ठाकरे खेमे की चुनौतियों बढ़ रही है।