
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र के आखिरी दिन भाजपा के वरिष्ठ विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया। मुनगंटीवार ने वीर सावरकर को मरणोपरांत भारत रत्न देने संबंधी प्रस्ताव पर कार्रवाई में हो रही देरी को लेकर फडणवीस सरकार से तीखे सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि अगर सत्ता में आने के बाद राज्य सरकार की विचारधारा बदल गई है तो वह भविष्य में इस मुद्दे को कभी नहीं उठाएंगे, लेकिन सरकार के काम उसकी घोषित विचारधारा से मेल नहीं खाते।
मुनगंटीवार ने विधानसभा में कहा कि उन्होंने मार्च में वीर सावरकर को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित करने का प्रस्ताव रखा था। उस समय विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने इसे सदन में लाने का आश्वासन दिया था, लेकिन चार महीने बाद भी प्रस्ताव पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि अगर सरकार का इस मुद्दे पर रुख बदल गया है तो उसे खुलकर इसकी घोषणा करनी चाहिए। लेकिन आपके काम उस विचारधारा से मेल नहीं खाते, जिसके पालन का आप दावा करते हैं।
भाजपा विधायक ने सदन में कहा कि वीर सावरकर ने अंग्रेजों के शासन में अमानवीय यातनाएं झेली थीं। कम से कम अब हम भारत रत्न देने में देरी करके उन्हें तकलीफ नहीं दें। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर एक प्रस्ताव पारित करने में इतना समय क्यों लग रहा है। उन्होंने कहा कि मार्च से जुलाई तक दो विधानसभा सत्र बीत चुके हैं, लेकिन फाइल अब भी आगे नहीं बढ़ी है।
पूर्व मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने कहा, "मैंने अपना पूरा जीवन सावरकर की विचारधारा के लिए समर्पित किया है। यह देखकर दुख होता है कि हमारी अपनी सरकार ही इस फाइल पर बैठी हुई नजर आ रही है। मुझे इसका गहरा अफसोस है। अब मैं भविष्य में इस मुद्दे को दोबारा नहीं उठाऊंगा।"
जिसके बाद इस मामले पर विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने सदन को बताया कि सरकार ने इस विषय पर अपनी प्रक्रिया जारी रखने की जानकारी दी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वीर सावरकर को भारत रत्न देने संबंधी प्रस्ताव को अगले विधानसभा सत्र में मंत्रणा समिति (BAC) के समक्ष विचार के लिए रखा जाएगा।