BrahMos Spying Case: बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि नौ महीने की अवधि में मामले से जुड़े केवल छह गवाहों की ही परिक्षण हो पाया है। जबकि अधिकांश गवाह गवाही देने के लिए उपस्थित नहीं हुए हैं।
Nishant Aggrawal Bail: पाकिस्तान (Pakistan) की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार पूर्व ब्रह्मोस (BrahMos) इंजीनियर निशांत अग्रवाल (Nishant Agrawal) को बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने जमानत दे दी है। कोर्ट ने कहा कि अग्रवाल 4 साल 6 महीने से अधिक समय से जेल में हैं। जबकि इस मामले में दोषी पाए जाने पर अधिकतम सजा 14 साल होगी।
बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ के जस्टिस अनिल एस किलोर (Anil S Kilor) ने जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि प्रथम दृष्टया यह साबित करने के लिए साक्ष्य नहीं है कि अग्रवाल की मंशा कथित जासूसी करने की थी। अदालत ने कहा “...यह एक प्रकार का हनी ट्रैप (Honey Trap) है। इसके अलावा, प्रथम दृष्टया ऐसा कुछ भी नहीं है कि जो यह बताता हो कि याचिककर्ता ने कथित कृत्य को जानबूझकर अंजाम दिया है।“ यह भी पढ़े-महाराष्ट्र में कोरोना ने फिर बढ़ाई चिंता, लगातार तीसरे दिन संक्रमण के हजार से ज्यादा केस, 4 की मौत
4 साल तक ब्रह्मोस में किया था काम
मालूम हो कि निशांत अग्रवाल ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड (Brahmos Aerospace) नागपुर के वरिष्ठ सिस्टम इंजीनियर थे और मिसाइल परियोजनाओं में शामिल थे। अग्रवाल को आईएसआई को परियोजनाओं के बारे में गोपनीय जानकारी देने के आरोप में यूपी व महाराष्ट्र एटीएस और मिलिट्री इंटेलिजेंस द्वारा अक्टूबर 2018 में नागपुर के पास से गिरफ्तार किया गया था।
चार साल तक ब्रह्मोस में काम करने वाले इंजीनियर निशांत अग्रवाल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC), आईटी एक्ट और कड़े आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (ओएसए) के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था।
सॉफ्टवेयर से भेजी थी संवेदनशील जानकारियां
चार्जशीट के मुताबिक अग्रवाल के लैपटॉप से बेहद गोपनीय फाइलें मिली थीं। इसके अलावा, एक सॉफ्टवेयर भी पाया गया, जिससे लैपटॉप में मौजूद संवेदनशील तकनीकी जानकारियों को विदेशों और असामाजिक तत्वों को भेजा गया था।
2022 में हाईकोर्ट ने अग्रवाल की जमानत याचिका को ख़ारिज कर दिया था और कहा था यदि छह महीने में मुकदमे में प्रगति नहीं होती है तो वह फिर से जमानत अर्जी दाखिल कर सकते है। इसके बाद मुकदमे में कोई प्रगति नहीं होने का हवाला देते हुए अग्रवाल ने फिर से जमानत के लिए आवेदन किया।
हनी ट्रैप में फंसाने का आरोप
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह हनी ट्रैप का मामला है। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने यह आरोप नहीं लगाया है कि अगर अभियुक्त को जमानत पर रिहा किया जाता है तो राज्य की सुरक्षा को खतरा है।
कोर्ट ने कहा कि नौ महीने की अवधि में मामले से जुड़े केवल छह गवाहों की ही परिक्षण हो पाया है। जबकि अधिकांश गवाह गवाही देने के लिए उपस्थित नहीं हुए हैं। मामले की सुनवाई जल्द पूरी होने की संभावना नहीं है।
इस प्रकार, कोर्ट ने आरोपी को 25,000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी। साथ ही मुकदमे की समाप्ति तक सप्ताह में तीन बार नागपुर पुलिस स्टेशन में हाजिरी देने का आदेश दिया।