मुंबई

WhatsApp पर SC/ST व्यक्ति की आपत्तिजनक फोटो-वीडियो शेयर करना अपराध, बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा- ‘पब्लिक व्यू’ में माना जाएगा

Bombay High Court : बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने कहा कि SC/ST व्यक्ति के आपत्तिजनक फोटो या वीडियो WhatsApp जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित करना ‘पब्लिक व्यू’ के दायरे में आ सकता है और SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रावधान लागू हो सकते हैं।
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Oct 01, 2026
Bombay High Court
SC/ST व्यक्ति की आपत्तिजनक फोटो-वीडियो शेयर करना अपराध, फोटो सोर्स- ANI

SC ST Prevention of Atrocities Act:बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) से संबंधित व्यक्ति के आपत्तिजनक फोटो या वीडियो को WhatsApp जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित करना SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों के तहत अपराध माना जा सकता है। अदालत ने कहा कि सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री का प्रसार ‘पब्लिक व्यू’ के दायरे में आता है।

WhatsApp पर शेयर करने को ‘पब्लिक व्यू’ माना

अदालत ने कहा कि अगर किसी SC/ST व्यक्ति की आपत्तिजनक तस्वीर या वीडियो को WhatsApp के माध्यम से अन्य लोगों तक पहुंचाया जाता है, तो यह निजी बातचीत तक सीमित नहीं माना जाएगा। ऐसी सामग्री के प्रसार का दायरा ‘पब्लिक व्यू’ की शर्त को पूरा कर सकता है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किसी आपत्तिजनक सामग्री को साझा किए जाने से वह अन्य लोगों की नजर में आती है। ऐसे मामलों में SC/ST (Prevention of Atrocities) Act के तहत कार्रवाई का प्रावधान लागू हो सकता है।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने किया था फैसला

बता दें कि इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी कहा है कि सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति को उसकी जाति के आधार पर अपमानित करना या आपत्तिजनक टिप्पणी करना SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत अपराध के दायरे में आ सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून में इस्तेमाल ‘सार्वजनिक’ शब्द का अर्थ सिर्फ ऐसी भौतिक जगह नहीं है, जहां लोग मौजूद हों, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर की गई गतिविधियां भी इसके दायरे में आ सकती हैं।

डिजिटल प्लेटफॉर्म तक लागू हो सकता है कानून

न्यायमूर्ति उदय कुमार की एकल पीठ ने कहा कि SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(द) और 3(1)(ध) में ‘सार्वजनिक’ होने की शर्त को केवल पारंपरिक या भौतिक स्थानों तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। अदालत के मुताबिक, तकनीक और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए ‘पब्लिक’ की अवधारणा का दायरा इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों तक भी विस्तारित हो सकता है।

Updated on:
01 Oct 2026 12:18 pm
Published on:
01 Oct 2026 12:01 pm
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