मुंबई

कांग्रेस को लगा बड़ा झटका, उद्धव गुट के समर्थन से चंद्रपुर में खिला ‘कमल’

Chandrapur Municipal Election 2026: महाराष्ट्र के चंद्रपुर नगर निगम में सबसे ज्यादा पार्षद होने के बावजूद कांग्रेस अपना मेयर नहीं बना सकी है।
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Feb 10, 2026
Uddhav Thackeray Devendra Fadnavis meeting
सीएम फडणवीस और उद्धव ठाकरे (Photo: IANS/File)

चंद्रपुर नगर निगम के मेयर (महापौर) और उपमहापौर चुनाव में मंगलवार को एक ऐसा नाटकीय मोड़ आया, जिसने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है। 66 सदस्यीय इस नगर निकाय में 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद कांग्रेस अपना महापौर बनाने में विफल रही। भाजपा ने राजनीतिक दांव चलते हुए ऐन वक्त पर उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) का समर्थन हासिल कर लिया और सत्ता पर कब्जा जमा लिया। भाजपा की पार्षद संगीता खांडेकर चंद्रपुर की नई मेयर चुनी गई हैं। जबकि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के पार्षद प्रशांत दानव को उपमहापौर चुना गया। इस अप्रत्याशित गठबंधन ने कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाकर उसे सत्ता से बाहर कर दिया है।

भाजपा की संगीता खांडेकर ने अपने सबसे करीबी विरोधी को एक वोट से हराकर शिवसेना (उद्धव गुट) के समर्थन से मेयर पद जीत लिया। कांग्रेस मेयर चुनाव में अपनी जीत पक्की मान कर चल रही थी। लेकिन कांग्रेस और शिवसेना (UBT) के बीच हुई कई दौर की बातचीत से कोई समाधान नहीं निकला, जबकि जनविकास सेना के नेता पप्पू देशमुख ने कहा कि उनकी पार्टी कांग्रेस को समर्थन देगी।

लॉटरी से हुआ उप-मेयर का फैसला

मेयर चुनाव के बाद उप-मेयर पद के लिए मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया। इस पद के लिए हुए मतदान में भाजपा समर्थित ठाकरे गुट के उम्मीदवार प्रशांत दानव और कांग्रेस समर्थित जनविकास सेना के उम्मीदवार पप्पू देशमुख के बीच सीधी टक्कर थी। दोनों उम्मीदवारों को बराबर 32-32 वोट मिले, जिससे चुनाव फंस गया। जिसके बाद लॉटरी के जरिए फैसला किया गया, जिसमें किस्मत ने प्रशांत दानव का साथ दिया और वे चंद्रपुर के नए उपमहापौर बन गए। हालांकि, इस गठबंधन ने ठाकरे खेमे के भीतर ही विवाद खड़ा कर दिया है।

ठाकरे के जिला प्रमुख बोले- गद्दारी नहीं की

इस उलटफेर के बाद उद्धव गुट के वरिष्ठ नेता अंबादास दानवे ने बागी पार्षदों पर कार्रवाई के संकेत दिए हैं। वहीं, जिला प्रमुख संदीप गिरहे ने अपना बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने उद्धव ठाकरे के साथ कोई गद्दारी नहीं की है। गिरहे ने दावा किया कि वे लगातार पार्टी के बड़े नेता वरुण सरदेसाई के संपर्क में थे और सारी जानकारी उन्हें तथा उद्धव ठाकरे को दी जा रही थी। उन्हें पार्टी के हित में फैसला लेने के निर्देश मिले थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार सकारात्मक थे, लेकिन विधायक प्रतिभा धानोरकर ने ठाकरे गुट को समर्थन देने या उनकी मांगें मानने से इनकार कर दिया था।

गिरहे के अनुसार, कांग्रेस ने उन्हें कमतर आंका, जिसके कारण उन्हें अपने कार्यकर्ताओं और पार्टी की मजबूती के लिए भाजपा के साथ जाने का निर्णय लेना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि सुबह तक उनकी (ठाकरे गुट) भूमिका भाजपा के साथ न जाने की थी।

सबसे बड़ी पार्टी होकर भी हारी कांग्रेस

66 सदस्यीय चंद्रपुर नगर निगम में कांग्रेस 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, जबकि भाजपा को 23 सीटें मिली थीं। उद्धव ठाकरे गुट को 6 सीटें, जनविकास सेना को 3, वंचित बहुजन आघाड़ी को 2 और एआईएमआईएम, बसपा व शिवसेना को एक-एक सीट मिली, जबकि दो निर्दलीय उम्मीदवार भी विजयी हुए थे। नतीजे 16 जनवरी को घोषित हुए थे, लेकिन आखिरी समय तक कांग्रेस और उद्धव ठाकरे गुट के बीच बातचीत से कोई सहमति नहीं बन सकी।

इस अप्रत्याशित राजनीतिक उलटफेर को चंद्रपुर की स्थानीय राजनीति में बड़ा मोड़ माना जा रहा है, जिसका असर आने वाले दिनों में राज्य की सियासत पर भी पड़ सकता है।

Updated on:
10 Feb 2026 04:42 pm
Published on:
10 Feb 2026 04:41 pm