रत्न (Gems) और आभूषणों (Jewellery) का सबसे ज्यादा निर्यात मुंबई से होता है। अंधेरी पूर्व स्थित सीप्ज (SEEPZ) और बीकेसी स्थित भारत डायमंंड बोर्स हीरा और आभूषण निर्यात के प्रमुख केंद्र हैं। लॉकडाउन के चलते निर्यातक परेशान थे कि वे निर्यात ऑर्डर पूरा कर पाएंगे या नहीं। महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Govt.) के इस फैसले से निर्यातक नुकसान से बच जाएंगे।
मुंबई. कोरोना (Covid-19) की रोकथाम के लिए घोषित लॉकडाउन (l0ckdown) के बीच राज्य की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश महाराष्ट्र सरकार कर रही है। इसी कड़़ी में सौ फीसदी निर्यात आधारित हीरा (Diamond) और आभूषण (Jewellery) इकाइयों को शर्तों के साथ कारखाने चालू करने की छूट दी गई है। सरकार ने शर्त यह लगाई है कि कंपनी मालिक सीमित संख्या में कर्मचारियों के साथ उत्पादन गतिविधियां शुरू करेंगे। लॉकडाउन जारी रहने तक कर्मचारियों को कारखाना लाने और वापस उन्हें घर छोडऩे की जिम्मेदारी भी कंपनी मालिकों की होगी। सरकार की ओर से सख्त हिदायत दी गई है कि ज्वैलरी कारखानों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन होना चाहिए।
महाराष्ट्र सरकार के इस कदम से रत्न व आभूषण निर्यातकों ने राहत की सांस ली है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई हीरा और आभूषण निर्यात का प्रमुख केंद्र है। यहां स्थित भारत डायमंड बोर्स और सीप्ज में दर्जनों कंपनियां हैं, जो रत्न व आभूषणों का निर्यात करती हैं। उत्पादन शुरू होने के बाद भारत डायमंड बोर्स और सीप्ज स्थिति ज्वैलरी इकाइयां निर्यात ऑर्डर पूरा कर सकती हैं। चूंकि सूरत डायमंड बोर्स (Surat Diamond Bourse) और जयपुर (Jaipur) में कारोबार पहले से शुरू हो चुका है। इसलिए राज्य सरकार की अनुमति मिलने के बाद मुंबई के ज्वैलरी और हीरा निर्यातक भी खुश हैं।
अब हम भेज सकेंगे पेंडिंग निर्यात ऑर्डर
जेम्स एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) के अध्यक्ष प्रमोद कुमार अग्रवाल ने महाराष्ट्र सरकार के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि अब हम रत्न एवं आभूषणों का पेंडिंग निर्यात ऑर्डर (Pnding Export Order) भेज सकेंगे। उन्होंने कहा कि अगले कुछ दिनों में भारत डायमंड बोर्स (Bharat Diamond Bourse) और सीप्ज में काम शुरू हो जाएगा। सरकार ने सोशल डिस्टेंसिंग और फैक्ट्री सेनेटाइजेशन की जो शर्त रखी है, उसका हम पालन करेंगे।