PM Cares Fund: दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर कि कोई फंड सार्वजनिक प्राधिकरण है और कुछ सार्वजनिक कार्य करता है, उसका निजता का अधिकार समाप्त नहीं हो जाता।
दिल्ली हाईकोर्ट ने 'पीएम केयर्स फंड' (PM Cares Fund) से जुड़े सूचना का अधिकार (RTI) मामले में महत्वपूर्ण बात कही है। कोर्ट ने कहा कि भले ही यह एक सरकारी या कानूनी संस्था (विधिक निकाय) हो, लेकिन इसे निजता के अधिकार (Right to Privacy) से वंचित नहीं किया जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने मंगलवार को मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि भले ही पीएम केयर्स फंड एक स्टेट या सार्वजनिक प्राधिकरण हो, लेकिन सिर्फ इस वजह से उसका निजता का अधिकार खत्म नहीं हो जाता। सार्वजनिक कार्य करने वाली संस्थाओं के पास भी निजता का अधिकार होता है।
यह मामला मुंबई के सामाजिक कार्यकर्ता गिरीश मित्तल की याचिका से जुड़ा है। उन्होंने RTI के जरिए पीएम केयर्स फंड को मिलने वाली टैक्स छूट (Tax Exemption) की जानकारी मांगी थी।
इससे पहले केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने आयकर विभाग को यह जानकारी देने का आदेश दिया था। लेकिन, हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान उस आदेश को रद्द कर दिया। अब गिरीश मित्तल ने उसी फैसले को चुनौती दी है।
गिरीश मित्तल के वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि आरटीआई कानून की धारा 8(1)(जे) के तहत मिलने वाली छूट केवल व्यक्तियों (Individuals) की निजता के लिए है। पीएम केयर्स फंड जैसे पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट को यह सुरक्षा नहीं मिलनी चाहिए। जनता को यह जानने का हक है कि फंड को टैक्स में छूट कैसे और किन दस्तावेजों के आधार पर मिली।
आदेश में एकल न्यायाधीश ने कहा था कि CIC को आयकर अधिनियम की धारा 138 के तहत आने वाली जानकारी सार्वजनिक करने का निर्देश देने का अधिकार नहीं है। कोर्ट अब इस मामले की सुनवाई 10 फरवरी को करेगा।