
मुंबई। बिलपावर लिमिटेड से जुड़े 160 करोड़ रुपए के बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने 25 अगस्त को मुंबई और वडोदरा में सात आवासीय और कारोबारी ठिकानों तथा तीन बैंक लॉकरों पर तलाशी ली। इस दौरान करीब 43.90 लाख रुपए नकद और करीब 12.20 करोड़ रुपए कीमत के जेवर जब्त किए गए। ईडी के अनुसार तलाशी के दौरान दो बैंक खातों में जमा करीब 27 लाख रुपए को धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 की धारा 17(1ए) के तहत फ्रीज किया गया। इसके साथ ही तीन बैंक लॉकर भी फ्रीज किए गए हैं।
यह जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो दिल्ली में भारतीय स्टेट बैंक की शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू हुई थी। मामले में सीबीआई ने 30 सितंबर 2024 को बिलपावर लिमिटेड, उसके निदेशकों और सहयोगी कंपनियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। ईडी की जांच के अनुसार बिलपावर लिमिटेड ने भारतीय स्टेट बैंक से अलग-अलग तरह का लोन लिया गया था। आरोप है कि कंपनी ने लोन की रकम को दूसरे कामों में इस्तेमाल कर खातों में हेरफेर किया। इससे बैंक को 160.55 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
कंपनी का ऋण खाता 18 अप्रेल 2012 को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति घोषित हुआ था और उस समय मूल बकाया 160.55 करोड़ रुपए था। जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी ने कुछ फर्जी कंपनियों के साथ लेन-देन किया। आरोप है कि इन कंपनियों का इस्तेमाल बैंक की रकम को दूसरी जगह भेजने और फिर वापस घुमाने के लिए किया गया। इन कंपनियों के पक्ष में लेटर ऑफ क्रेडिट जारी किए गए और कथित तौर पर जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।
ईडी के मुताबिक, इस रकम का एक हिस्सा कुछ परिवार के सदस्यों और उनके सहयोगियों के नियंत्रण वाली अलग-अलग कंपनियों और संस्थाओं तक पहुंचाया गया। तलाशी में ईडी को अचल संपत्तियों, जमीन और मशीनरी से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं। ईडी के अनुसार, बिलपावर लिमिटेड ट्रांसफार्मर के लेमिनेशन और कोर बनाने का काम करती है। कंपनी का प्रबंधन राजेंद्र कुमार चौधरी, सुरेश कुमार चौधरी और नरेशकुमार चौधरी के पास था। तलाशी में ईडी को अचल संपत्तियों, जमीन और मशीनरी से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं। इसके अलावा खातों की किताबें, लेजर, अन्य दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी बरामद किए गए हैं। मामले में जांच जारी है।