मुंबई

कैबिनेट बैठक से नदारद, फिर दिल्ली पहुंचे एकनाथ शिंदे; नाराजगी की अटकलों के बीच ‘धनुष-बाण’ पर दिया बड़ा बयान

Eknath Shinde Latest Statement: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के कैबिनेट बैठक में शामिल नहीं होने और दिल्ली दौरे से उनकी नाराजगी की अटकलें तेज हो गईं। शिंदे ने सफाई देते हुए दिल्ली आने की वजह बताई और 'धनुष-बाण' चुनाव चिह्न को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा।
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Sep 02, 2026
Eknath Shinde
नाराजगी की अटकलों के बीच महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे दिल्ली पहुंचे। (फाइल फोटो-IANS)

Maharashtra Politics:महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कैबिनेट बैठक में शामिल नहीं होने और उसके बाद अचानक दिल्ली पहुंचने से मंगलवार को सियासी चर्चाएं तेज हो गईं। सवाल उठने लगा कि क्या महायुति सरकार में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है? लेकिन दिल्ली पहुंचने के बाद शिंदे ने खुद इन अटकलों पर विराम लगा दिया। उन्होंने साफ कहा कि दिल्ली आने के पीछे कोई खास राजनीतिक वजह नहीं है। यहां उनके पहले से कई कार्यक्रम और बैठकें तय थीं।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में मंगलवार दोपहर मंत्रालय में कैबिनेट की बैठक हुई थी। शिंदे इसमें शामिल नहीं हुए। इसके बाद वह मुंबई से दिल्ली के लिए रवाना हो गए। उनकी गैरमौजूदगी और दिल्ली दौरे को देखते हुए महाराष्ट्र की राजनीति में तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे।

दिल्ली आने की कोई खास वजह नहीं होती: शिंदे

दिल्ली पहुंचने के बाद शिंदे ने कहा कि उन्हें कई राज्यों के शिवसेना प्रमुखों के साथ बैठक करनी थी। पार्टी से जुड़े संगठनात्मक मुद्दों पर भी चर्चा होनी थी। इसके अलावा कई लोग उनसे मिलना चाहते थे और सभी का मुंबई आना संभव नहीं था, इसलिए वह खुद दिल्ली आ गए।

इस सफाई के बाद फिलहाल उनकी नाराजगी को लेकर चल रही चर्चाओं को कोई ठोस आधार नहीं मिला है। बीजेपी ने भी पहले ही कहा था कि शिंदे के कुछ कार्यक्रम पहले से तय थे, इसलिए वह कैबिनेट बैठक में नहीं पहुंच सके।

'धनुष-बाण' पर विपक्ष को शिंदे का जवाब

दिल्ली दौरे के दौरान शिंदे ने शिवसेना के चुनाव चिह्न 'धनुष-बाण' को लेकर भी अपनी बात रखी। विपक्ष की ओर से चुनाव चिह्न को फ्रीज करने की मांग पर उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

शिंदे ने कहा कि 'धनुष-बाण' उनके लिए सिर्फ एक चुनाव चिह्न नहीं, बल्कि शिवसेना की पहचान और बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा से जुड़ा प्रतीक है। उनके मुताबिक इस चिह्न को फ्रीज करने की मांग करना बालासाहेब की विचारधारा और महाराष्ट्र की जनता के जनादेश को चुनौती देने जैसा है।

उन्होंने यह भी कहा कि शिवसेना बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा को आगे बढ़ा रही है और चुनाव चिह्न को लेकर पार्टी अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखेगी।

महायुति के बीच मतभेद की चर्चा क्यों?

शिंदे की गैरमौजूदगी को लेकर चर्चा इसलिए भी तेज हुई, क्योंकि पिछले कुछ समय से बीजेपी और शिवसेना के बीच मराठी भाषा समेत कई मुद्दों पर अलग-अलग रुख सामने आया है। मुंबई जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के चुनाव को लेकर भी दोनों दलों के आमने-सामने आने की संभावना की चर्चा है।

हालांकि, इन राजनीतिक मतभेदों को शिंदे की कैबिनेट से गैरमौजूदगी से जोड़ना अभी जल्दबाजी होगी। खुद शिंदे और बीजेपी दोनों ने नाराजगी की बात से इनकार किया है।

दिल्ली में शिंदे ने इसी दौरान देश की आर्थिक स्थिति पर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की। उन्होंने भारत की 7.8 प्रतिशत GDP वृद्धि को बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि देश विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है।

यानी जिस दिल्ली दौरे ने महाराष्ट्र में नाराजगी की चर्चा छेड़ी थी, फिलहाल उसकी तस्वीर कुछ अलग नजर आ रही है। शिंदे का फोकस पार्टी संगठन, कानूनी लड़ाई और राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक मुद्दों पर ज्यादा दिखाई दे रहा है।

Updated on:
02 Sept 2026 09:13 am
Published on:
02 Sept 2026 09:12 am
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