
Kolhapur Dairy Election: महाराष्ट्र की गोकुल डेयरी को लेकर सियासत तेज हो गई है। कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ के चुनाव में कांग्रेस समर्थित पैनल ने 25 में से 13 सीटें जीतकर बढ़त हासिल की थी। वहीं, भाजपा और उसके सहयोगी दलों के समर्थन वाले महायुति पैनल को 12 सीटें मिलीं। इसके बावजूद अब डेयरी के अध्यक्ष पद को लेकर पेच फंस गया है। इसी बीच महाराष्ट्र सरकार ने सहकारी संस्थाओं के कानून में बदलाव को मंजूरी दे दी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस फैसले को लेकर भाजपा पर निशाना साधा है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि गोकुल डेयरी के चुनाव में दूध उत्पादकों ने भाजपा को नकार दिया, लेकिन चुनाव के बाद नियम बदलकर सत्ता का गणित बदलने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि चार अतिरिक्त निदेशकों को शामिल करने से बहुमत का पूरा हिसाब बदल सकता है। राहुल ने इसे दूध उत्पादकों के वोट और उनके फैसले का अपमान बताया।
गोकुल डेयरी के 25 निदेशक पदों के लिए 19 अक्टूबर को चुनाव हुए थे। कांग्रेस नेता सतेज पाटिल के नेतृत्व वाले राजर्षि शाहू शेतकरी समविचारी आघाड़ी पैनल ने 13 सीटों पर जीत दर्ज की थी। दूसरी ओर, महायुति समर्थित पैनल को 12 सीटें मिली थीं। इस तरह सतेज पाटिल के पैनल को एक सीट की बढ़त हासिल थी।
चुनाव के बाद 29 अक्टूबर को अध्यक्ष चुनने के लिए बैठक बुलाई गई, लेकिन महायुति के सभी 12 निदेशक इसमें शामिल नहीं हुए। नियमों के मुताबिक अध्यक्ष का चुनाव कराने के लिए कम से कम 14 निदेशकों की मौजूदगी जरूरी थी। ऐसे में 13 निदेशकों के ही पहुंचने से बैठक में अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो सका। इस तरह बहुमत होने के बावजूद सतेज पाटिल के पैनल के सामने अध्यक्ष चुनने का रास्ता नहीं खुल पाया।
महाराष्ट्र कैबिनेट ने 4 नवंबर को सहकारी संस्थाओं के कानून में बदलाव को मंजूरी दी। इसके तहत 500 करोड़ रुपए से ज्यादा सालाना कारोबार करने वाली और सरकारी आर्थिक मदद पाने वाली सहकारी संस्थाओं के बोर्ड में पांच सरकारी नामित निदेशक शामिल किए जा सकेंगे। इनमें चार को मतदान का अधिकार होगा, जबकि पांचवें निदेशक के रूप में नियुक्त सरकारी अधिकारी वोट नहीं दे सकेगा।
इस बदलाव से गोकुल डेयरी का पूरा गणित बदल सकता है। फिलहाल सतेज पाटिल के पैनल के पास 13 और महायुति के पास 12 निदेशक हैं। यदि चारों मतदान अधिकार वाले सरकारी नामित निदेशक महायुति के पक्ष में जाते हैं तो उसके पास 16 वोट हो सकते हैं। ऐसे में 13 सीटें जीतने वाले सतेज पाटिल के पैनल की बढ़त खत्म हो जाएगी।
सरकार का कहना है कि बड़े सहकारी संस्थानों में कामकाज बेहतर बनाने और फैसले लेने में आने वाली रुकावटें दूर करने के लिए यह बदलाव किया जा रहा है। वहीं, विपक्ष का आरोप है कि इस फैसले से चुनाव के नतीजों का असर बदलने की कोशिश हो रही है।
इस विवाद के बीच बॉम्बे हाईकोर्ट की कोल्हापुर पीठ ने अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए 10 नवंबर को फिर बैठक बुलाने का निर्देश दिया है। सतेज पाटिल ने भी सरकार के फैसले को अदालत में चुनौती देने की बात कही है।
राहुल गांधी ने अपने बयान में भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि दूध उत्पादकों के वोट से खिलवाड़ करने वालों को याद रखना चाहिए कि किसान अपना अपमान नहीं भूलता। अब सबकी नजर 10 नवंबर की बैठक और सरकार के नए फैसले पर होने वाली कानूनी कार्रवाई पर है।