
मुंबई. महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार के हालिया मंत्रिमंडल विस्तार में मंत्री बने राधाकृष्ण विखे पाटील, जयदत्त क्षीरसागर व अविनाश महातेकर का पद अब खतरे में पड़ता नजर आ रहा है। इन्हें नियमों का उल्लंघन कर मंत्री बनाया गया है, यह दलील हाईकोर्ट में दी गई है। हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली है, जिस पर 24 जून को सुनवाई होगी। याचिका स्वीकारते हुए जस्टिस सत्यरंजन धर्माधिकारी ने कहा कि इस तरह के राजनीतिक मामले राजनीतिक तरीके से ही निपटाए जाने चाहिए।
एडवोकेट सतीश तलेकर की ओर से मंगलवार को यह याचिका दाखिल गई है। तलेकर ने कोर्ट से कहा कि यह तीनों नेता विधान मंडल के किसी भी सभागृह के सदस्य नहीं हैं। उनका सवाल है कि फिर इन्हें कैसे मंत्री बनाया जा सकता है। तलेकर का तर्क है कि संविधान की धारा 164 (1) के तहत तीनों नेताओं को मंत्री बनाने का असीमित अधिकार मुख्यमंत्री अथवा राज्यपाल के पास नहीं है।
वकील तलेकर ने कहा कि संविधान की धारा 164 (4) के अनुसार किसी भी सदन का नेता नहीं होने पर अपवाद वाले हालात में ही किसी नेता को मंत्री बनाया जा सकता है। सरकार के सामने कोई ऐसी अपवादात्मक स्थिति नहीं है। इसी तरह संविधान की धारा 164 (1ब) के अनुसार एक पार्टी छोड़ दूसरी में शामिल होने वाले नेता को भी मंत्री पद नहीं दिया जा सकता है। यह बात कांग्रेस के पूर्व नेता व विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे राधाकृष्ण विखे पाटील पर लागू होता है।