मुंबई

महाड हिंसा: क्या फडणवीस इतने असहाय हैं? बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को लगाई फटकार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि राज्य में कानून का राज कमजोर पड़ा है। अदालत ने पूछा कि आखिर फडणवीस सरकार के मंत्री के बेटे की गिरफ्तारी अब तक क्यों नहीं हुई।

2 min read
Jan 23, 2026
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Photo: IANS)

महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के महाड में हुई राजनीतिक हिंसा के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। कैबिनेट मंत्री भरत गोगावले के बेटे विकास गोगावले की गिरफ्तारी न होने पर अदालत ने राज्य में कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

ये भी पढ़ें

मराठी मेयर नहीं बनाया तो खून बहेगा… भाजपा के गढ़ में छिड़ा सियासी संग्राम, राज ठाकरे की मनसे भी कूदी

'24 घंटे में किसी को भी पकड़ सकती है सरकार'

गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति माधव जामदार की एकल पीठ ने कहा, "अगर सरकार चाहे तो वह 24 घंटे के भीतर किसी को भी गिरफ्तार कर सकती है। यह मामला राजनीतिक है और अपराध चुनावी प्रक्रिया से जुड़ा है। एक कैबिनेट मंत्री का बेटा फरार है और पुलिस उसे ढूंढ नहीं पा रही है? क्या महाराष्ट्र में कानून व्यवस्था की यही स्थिति है?"

हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी सवाल उठाते हुए पूछा, "क्या मुख्यमंत्री इतने असहाय हैं कि वे कुछ नहीं कर सकते? रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्य स्पष्ट दिखाते हैं कि राज्य में कानून का शासन प्रतिकूल रूप से प्रभावित हुआ है।"

बेहद सख्त रुख अख्तियार करते हुए न्यायमूर्ति माधव जामदार ने कहा, “मैंने अखबार में पढ़ा कि मंत्री भरत गोगावले 26 जनवरी को झंडा फहराने वाले हैं। उन्हें यह सम्मान दिया जा रहा है। क्यों? वह महाराष्ट्र राज्य के कैबिनेट मंत्री हैं और उनका बेटा फरार है। पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर पा रही है। तो क्या यही महाराष्ट्र में कानून के राज की स्थिति है? क्यों? वह (विकास गोगावले) कोई साधारण व्यक्ति नहीं है और मंत्री अब भी कैबिनेट में बने हुए हैं।“ अदालत ने पूछा कि मंत्री का बयान मामले में दर्ज क्यों नहीं किया गया। अदालत ने साफ कहा कि कानून के सामने कोई भी विशेष नागरिक नहीं है।

मंत्री के बेटे को सरेंडर करने का आदेश

अदालत की इस कड़ी फटकार के करीब एक घंटे बाद, सरकारी वकील ने पीठ को सूचित किया कि मंत्री अपने बेटे से संपर्क करेंगे और वह शुक्रवार सुबह तक आत्मसमर्पण कर देगा। इस पर अदालत ने मामले की सुनवाई शुक्रवार तक के लिए टाल दी और निर्देश दिया कि सुनवाई शुरू होने से पहले विकास गोगावले का सरेंडर कराया जाए। आज इस मामले की सुनवाई सबसे पहले हो सकती है।

फरार होने के बावजूद चुनावी पर्चा भरा

सुनवाई के दौरान अदालत इस बात पर भी भड़क गई कि फरार होने के बावजूद आरोपी ने आगामी जिला परिषद चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया है। जिसके बाद अदालत को बताया गया कि यह नॉमिनेशन एक प्रस्तावक के जरिए फाइल किया गया था।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद 2 दिसंबर 2025 को महाड नगर परिषद चुनाव के मतदान के दिन शुरू हुआ था। उस समय निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) और एनसीपी (अजीत पवार गुट) के समर्थकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। दोनों गुटों ने एक-दूसरे के खिलाफ मामला दर्ज कराया था।

एक एफआईआर में शिवसेना विधायक और मंत्री भरत गोगावले के बेटे विकास गोगावले, उनके चचेरे भाई महेश गोगावले और अन्य लोगों के नाम हैं। दूसरी एफआईआर एनसीपी नेता और पूर्व विधायक माणिक जगताप के बेटे श्रेयस जगताप और उनके समर्थकों के खिलाफ दर्ज हुई है। एनसीपी गुट का आरोप है कि विकास गोगावले और उनके समर्थकों ने उन पर हमला किया। वहीं, शिवसेना गुट का दावा है कि उन पर एनसीपी समर्थकों की ओर से गोलीबारी की गई थी, जो मिसफायर हो गई।

हाईकोर्ट पहले ही विकास गोगावले और अन्य की अग्रिम जमानत खारिज कर चुकी है। हालांकि श्रेयस जगताप को शुक्रवार तक गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी है।

Updated on:
23 Jan 2026 07:47 am
Published on:
23 Jan 2026 07:31 am
Also Read
View All

अगली खबर