
चाचा शरद पवार से विलय की चर्चा और अजित पवार की रहस्यमयी मौत! (Photo: IANS)
महाराष्ट्र के कद्दावर नेता और उपमुख्यमंत्री अजित पवार का बुधवार (28 जनवरी) को पुणे के बारामती में विमान क्रैश होने से निधन हो गया। इस हादसे को लेकर सियासी बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है। जानकर भले ही इसे खराब मौसम और कम विजिबिलिटी के कारण हुई एक दुर्घटना मान रहा हो, लेकिन संजय राउत, अमोल मिटकरी और अनिल देशमुख जैसे बड़े नेताओं के बयानों ने इस पूरे घटनाक्रम को संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है।
शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने इस हादसे पर सनसनीखेज सवाल उठाते हुए इसकी तुलना जस्टिस लोया मामले से कर दी है। राउत ने कहा, अजित पवार जैसे कद्दावर नेता की इस तरह विमान दुर्घटना में मौत पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उनके मुताबिक, जो तथ्य सामने आ रहे हैं, वे किसी साधारण हादसे की ओर इशारा नहीं करते। उन्होंने दावा किया कि अजित पवार की पार्टी के लोग खुद सवाल उठा रहे हैं और यह पूरा मामला संदिग्ध प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि पर्दे के पीछे कुछ जरूर हुआ है।
राउत के अनुसार, जब अजित दादा ने 'घर वापसी' (दोनों एनसीपी का विलय) करने की इच्छा जताई थी, तब उन्हें कथित तौर पर सिंचन घोटाले की फाइलों के जरिए भाजपा की ओर से धमकाया गया था। इस विवाद के मात्र दस दिनों के भीतर ही अजित पवार की रहस्यमयी मौत हो जाना कई गहरे सवाल पैदा करता है और इसकी गहन जांच होनी चाहिए कि क्या इस विमान हादसे के पीछे किसी का हाथ है।
दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए उद्धव गुट के दिग्गज नेता संजय राउत ने कहा, "अजित दादा के साथ जो दुर्घटना हुई है उसपर सवाल उठेंगे और उठने भी चाहिए। वे बड़े नेता थे और उनकी जिस स्थिति में विमान दुर्घटना में मौत हुई है, उसके बाद जो तथ्य सामने आ रहे हैं, कुछ न कुछ गड़बड़ है। यह सवाल अजित दादा की पार्टी से खुद उठ रहे हैं, उनकी मौत रहस्यमय है... पर्दे की पीछे कुछ तो हुआ है। अजित दादा ने कहा था कि मैं पुराने घर में जाना चाहता हूं, उसके बाद भाजपा के लोगों ने अजित दादा को धमकाया कि अभी तक आपके सिंचाई घोटाले की फाइल बंद नहीं हुई है। जिसके जवाब में अजित दादा ने कहा कि मेरे सिंचाई घोटाले को छोड़ दीजिए, आपके सिंचाई घोटाले की फाइल मेरे पास है...इसके 10 दिन बाद अजित पवार की रहस्यमय मौत होती है, इसका क्या अर्थ है... कुछ तो गड़बड़ है।"
वहीं दूसरी ओर, एनसीपी (अजित पवार) विधायक अमोल मिटकरी ने घटनास्थल की परिस्थितियों पर गंभीर सवाल उठाये है। मिटकरी का कहना है कि यह बात समझ से परे है कि जिस हादसे में विमान में सवार लोग इस हद तक जल गए कि वें पहचान में न आ सके, उसी विमान में मौजूद कागजात कैसे नहीं जले। उन्होंने अंतिम क्षणों में पायलट और विमान के रूट में किए गए अचानक बदलावों पर भी सवाल उठाए हैं।
अजित पवार के करीबी माने जाने वाले अमोल मिटकरी ने रविवार को मीडिया से बात करते हुए कहा था, “जब अजित दादा का शरीर बुरी तरह जल गया और पहचानना मुश्किल था, तो उनके विमान में मौजूद कागजात कैसे नहीं जले? खबरों में बताया गया कि विमान में 6 लोग सवार थे, लेकिन मौके से केवल 5 शव ही क्यों बरामद हुए? अगर छठा व्यक्ति था, तो वह कहां गायब है? ऐन वक्त पर पायलट क्यों बदला गया? रूट में भी बदलाव किया गया, जिस पायलट को विमान उड़ाने की जिम्मेदारी दी गई, उसका पिछला रिकॉर्ड अच्छा नहीं था।"
मिटकरी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की है और वे इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने की तैयारी में हैं।
वहीँ, शरद पवार नीत एनसीपी (एसपी) के वरिष्ठ नेता व पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख ने भी हादसे के कारणों पर शक जाहिर किया है। उन्होंने कहा कि कम विजिबिलिटी के तर्क पर यकीन करना मुश्किल है क्योंकि हादसे के वक्त जो वीडियो सामने आए हैं उनमें विमान स्पष्ट रूप से उड़ता हुआ और लैंडिंग के दौरान अचानक मुड़ता हुआ दिखाई दे रहा है और क्रैश हो जाता है। इसलिए, दुर्घटना के कारण के रूप में कम दृश्यता का उल्लेख किए जाने पर कई लोगों को संदेह है।
उन्होंने उम्मीद जताई है कि बरामद किया गया ब्लैक बॉक्स इस रहस्य से पर्दा उठाएगा कि आखिरी पलों में विमान के भीतर क्या हुआ था। फिलहाल पूरे महाराष्ट्र की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, इससे स्पष्ट हो जाएगा कि इस दुखद हादसे के पीछे का असल कारण क्या है।
Updated on:
02 Feb 2026 12:51 pm
Published on:
02 Feb 2026 12:46 pm

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