मुंबई

Earthquake: नासिक में तीन दिन में 5 बार भूकंप के झटके, त्र्यंबकेश्वर में भी बढ़ी चिंता

Nashik Earthquake Update: प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और सतर्क रहें। किसी भी आपात स्थिति में तुरंत संपर्क करें।

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Feb 25, 2026
नासिक में तीन दिन में 5 बार भूकंप के झटके (Patrika Photo)

महाराष्ट्र के नासिक जिले के सीमावर्ती इलाकों में पिछले तीन दिनों से धरती के कांपने का सिलसिला थम नहीं रहा है। हरसूल और पेठ क्षेत्र में रविवार से लेकर मंगलवार तक लगातार पांच बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि ये सभी झटके कम तीव्रता के थे, लेकिन बार-बार हो रही इस भूगर्भीय हलचल ने स्थानीय निवासियों की नींद उड़ा दी है और पूरे जिले में चिंता का माहौल है।

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3 दिन में 5 बार लगे भूकंप के झटके

नासिक के मेरी स्थित भूकंप मापन केंद्र के अनुसार, रविवार (22 फरवरी) शाम से शुरू हुआ यह सिलसिला मंगलवार (24 फरवरी) सुबह तक जारी रहा। रिकॉर्ड के मुताबिक, रविवार शाम 7:49 बजे और रात 9:35 बजे 1.5 रिक्टर स्केल के दो झटके महसूस किए गए। इसके बाद सोमवार तड़के 5:03 बजे और सुबह 7:28 बजे फिर से धरती हिली। मंगलवार सुबह 6:48 बजे एक बार फिर 1.5 तीव्रता का झटका दर्ज किया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि लगातार पांच बार एक ही तीव्रता के झटके आये।

दहशत में हरसूल और पेठ

जानकारी के अनुसार, इन झटकों का केंद्र नासिक शहर से लगभग 38 किमी दूर बताया जा रहा है। हालांकि, अत्याधुनिक उपकरणों की कमी के कारण अब तक भूकंप का केंद्र (एपिसेंटर) का पता नहीं लगा है। हालांकि भूकंप की तीव्रता कम होने के कारण अभी तक किसी भी प्रकार की जनहानि या संपत्ति के नुकसान की खबर नहीं है।

अवैध निर्माण ने बढ़ाई चिंता

हरसूल और पेठ में आ रहे इन झटकों का सबसे ज्यादा असर प्रसिद्ध तीर्थस्थल त्र्यंबकेश्वर में महसूस किया जा रहा है। हरसूल और त्र्यंबकेश्वर के बीच की दूरी बहुत कम है। जानकारों का मानना है कि यदि भविष्य में अधिक तीव्रता का भूकंप आता है, तो त्र्यंबकेश्वर में हो रहे अनियंत्रित और अवैध निर्माण सबसे पहले धराशायी हो सकते हैं।

शहर में कई ऊंची इमारतें खड़ी की जा रही हैं, जिनमें सुरक्षा मानकों और भूकंपरोधी तकनीकों की अनदेखी के आरोप लगते रहे हैं। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि इन अवैध निर्माणों पर तुरंत रोक लगाई जाए और सुरक्षा ऑडिट किया जाए, ताकि किसी बड़ी प्राकृतिक आपदा के समय जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके।

Published on:
25 Feb 2026 10:37 am
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