
ओवैसी की पार्टी AIMIM की पार्षद सहर शेख (Photo: IANS)
महाराष्ट्र के ठाणे महानगरपालिका चुनाव (TMC Election) में मुंब्रा के वार्ड-30 से जीत दर्ज कर सुर्खियों में आईं एआईएमआईएम (AIMIM) पार्षद सहर शेख (Sahar Shaikh) एक बार फिर विवादों में आ गई हैं। इस बार मामला फर्जी जाति प्रमाण पत्र और सरकारी तंत्र को गुमराह करने के आरोपों से जुड़ा है। खबर है कि यह मामला गरमाने के बाद सहर शेख और उनके पिता यूनुस शेख पिछले कुछ दिनों से 'नॉट रिचेबल' हो गए हैं।
ठाणे के तहसीलदार कार्यालय ने पार्षद (नगरसेविका) सहर शेख के पिता यूनुस शेख पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र का इस्तेमाल करने और उसके आधार पर अपनी बेटी सहर शेख के लिए जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करने के आरोप में एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है।
चुनाव के बाद सहर शेख के ‘कैसा हराया…’ तंज ने देशभर में सुर्खियां बटोरी थीं। दरअसल सहर शेख इसी साल जनवरी में हुए महानगरपालिका चुनावों के बाद उस वक्त सुर्खियों में आई थीं, जब उन्होंने अपने पहले ही चुनाव में एनसीपी (शरद पवार) के वरिष्ठ नेता व स्थानीय विधायक जितेंद्र आव्हाड समर्थित उम्मीदवार को हरा दिया था। शेख ने तब विजय जुलूस में आव्हाड पर ‘कैसा हराया…’ तंज कसा था और पूरे मुंब्रा को हरा रंग से रंगने का वादा किया था। लेकिन जब उनकी इस टिप्पणी पर खूब विवाद होने लगा तो उन्होंने माफी मांग ली।
तहसीलदार उमेश पाटिल ने यूनुस शेख के खिलाफ मामला दर्ज करने की सिफारिश चुनाव में हारी एनसीपी (अजित गुट) उम्मीदवार सिद्दीकी फरहा शबाब अहमद की शिकायत पर सुनवाई करते हुए की। सिद्दीकी ने शेख सहर के जाति प्रमाण पत्र की वैधता को चुनौती दी है।
इस संबंध में सब-डिवीजन अधिकारी (एसडीओ) को सौंपी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि यूनुस शेख ने प्रथम दृष्टया चुनाव आयोग सहित चार सरकारी एजेंसियों को गुमराह किया है। रिपोर्ट में कहा गया कि यूनुस शेख का 2011 का ओबीसी प्रमाण पत्र आधिकारिक प्रारूप के अनुरूप नहीं था।
जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि सहर शेख के पिता और चाचा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के निवासी थे। उन्हें नियमों के तहत प्रवासियों वाला फॉर्म-10 प्रमाण पत्र प्राप्त करना अनिवार्य है। लेकिन शेख ने कथित तौर पर महाराष्ट्र के मूल निवासियों के लिए आरक्षित फॉर्म-8 के तहत प्रमाण पत्र प्राप्त किया। आरोप है कि इसके लिए शेख ने दस्तावेजों में हेरफेर की।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 2018 में इसी कथित फर्जी प्रमाण पत्र का इस्तेमाल करके सहर शेख के लिए भी जाति प्रमाण पत्र बनवाया गया था। इसके अलावा, परिवार ठाणे जिले में रहता है, लेकिन सहर शेख का प्रमाण पत्र मुंबई शहर कलेक्टर कार्यालय से बनवाया गया है।
इसलिए तहसीलदार ने सभी ऐसे प्रमाणपत्रों को तुरंत रद्द करने और धोखाधड़ी व जालसाजी के लिए यूनुस शेख पर प्राथमिकी दर्ज करने की सिफारिश की है।
इस पूरे मामले की शुरुआत एक शिकायत से हुई, जो सिद्दीकी फरहा शबाब अहमद ने दर्ज कराई थी। वह भी मुंब्रा के वार्ड-30 से चुनावी मैदान में थीं और एनसीपी (अजित पवार गुट) की उम्मीदवार थीं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सहर शेख ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जाति प्रमाणपत्र हासिल कर चुनाव लड़ा। इसलिए उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
ऐसे में अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो सहर शेख की पार्षद पद पर खतरे में आ सकती है। अब सबकी नजर आगे की जांच पर टिकी है, जो इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी।
इस बीच, विवाद बढ़ने के बाद सहर शेख और उनके पिता ने मीडिया से दूरी बना ली है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वें मुंब्रा इलाके में भी दिखाई नहीं दे रहे हैं। साथ ही पत्रकारों के फोन भी नहीं उठा रहे हैं, जिससे मामले को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
Published on:
16 Apr 2026 06:33 pm
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